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मैं कुछ लिखना चाह रही हूं पर क्या

बहुत सारे दोस्तों के मेल और फोन है तेरे ब्लाग पर रोज आते हैं और रोज निराश कर देती है। ये वैसा ही है जब आप बहुत न चाहते हुए भी मुस्कुराते हैं। कोई परिचित या ऐसा जिसे आप चाह कर भी उस समय अपने खराब मूड के बावजूद एक स्माइल तो दे ही देते हैं। लेकिन आपकी
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गुलज़ार ने आखिर ऐसा गीत क्यों लिखा होगा

डर लगता है तन्हा सोने में जी, दिल तो बच्चा है जी!गुलज़ार का लिखा ये गीत अभी हाल ही में रिलीज़ फिल्म इश्किया में हम लोगों ने सुना हैं। आपको क्या लगता है गुलज़ार ने इस तरह के गीत को लिखने से पहले क्या सोचा होगा?ऐसी उलझी नज़र उनसे हठती नहींदांत से रेशमी डोर
 
इरशाद अली
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दीपावली की उदासी

हर दूसरे पर्व की तरह आज दीपावली के दिन भी मन उदास हो गया। मैंने इसका कारण खोजने की कोशिश की लेकिन खोज नहीं पाया। क्या इसका कारण यह है कि सालों से एक ही तरह की चीज में अब कोई रस नहीं रह गया। जैसे अखबारों में इस अवसर पर निकलने वाले - दिए का संदेश, अंधर
 
Binod Ringania
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