मैं कुछ लिखना चाह रही हूं पर क्या
बहुत सारे दोस्तों के मेल और फोन है तेरे ब्लाग पर रोज आते हैं और रोज निराश कर देती है। ये वैसा ही है जब आप बहुत न चाहते हुए भी मुस्कुराते हैं। कोई परिचित या ऐसा जिसे आप चाह कर भी उस समय अपने खराब मूड के बावजूद एक स्माइल तो दे ही देते हैं। लेकिन आपकी
Apr 20 2010 06:17 PM



Shuffle








