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** काँपते हाथों में **

है यकीन मुझे,जानता हूँ, कितेरे काँपते हाथों में,जान अभी बाकी है...माना बहुत है,पर, तू भार उठा,जोर लगा, किअरमान एक बाकी है....यह जिंदगी,एक प्याला है,और मौत,तेरी साकी है...पीता चल,चलता चल,जब तक,जाम एक बाकी है....मधु बहती है,कविता उड़ती है,पंखों में
 
Jayant Chaudhary
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~ स्वर्णिम जीवन ~

जब तक है आस, संग संग प्रयास, मन में विश्वास, पाने की प्यास, उच्छल तरंग, दिल का म्रदंग, बाजे है संग, भर कर उमंग, हिरदय प्रसन, होकर मगन,बढ़ते हैं पाँव,उठते हैं हाथ,सच हों स्वपन, बने स्वर्णिम जीवन....जयंत चौधरी(बैठे बैठे एक ख्याल मन में आ गया...)
 
Jayant Chaudhary
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** जीवन क्या है? ** (~जयंत)

वो जीवन भी क्या जीवन है, जो घुटनों पर चल कर हो कटा, वो हस्त नहीं, बस माटी है, जो जिस तिस के आगे हो फैला, सीना वो व्यर्थ किया धड़का, जिसमें ना स्वाभिमान भरा, उत्तम है शीश, जो भूमि पर पड़ा, जब कंधों पे रहा, तब नहीं झुका.... ~जयंत चौधरी July 11, 2009
 
Jayant Chaudhary