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जरूर कोई ‘कांड’ हुआ है…

हि न्दी में कांड (काण्ड) शब्द खूब प्रचलित है। कांड का अर्थ है कोई घटना। आमतौर पर इसके साथ अप्रिय, अशुभ प्रसंग का संदर्भ जुड़ा है। कांड से काणा की भी रिश्तेदारी है। ऐसा कोई प्रकरण जो अतीत से चला आ रहा है, कांड के दायरे में आता है। मीडिया का भी यह प्रिय
 
अजित वडनेरकर
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इनकी रामायण, उनका पारायण!!!

भा रतीय मनीषा का सबसे महत्वपूर्ण तत्व है आस्था जिसकी वजह से उसने ज्ञान के विविध आयामों को छुआ है। समष्टि के प्रति आस्था के भाव ने न सिर्फ सृष्टि के स्थूल रूप को अनुभव किया बल्कि इस स्थूल भाव में भी जीवन के स्पंदन का चिंतन किया। इस विराट विश्व चिंतन का
 
अजित वडनेरकर
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अपना हाथ जगन्नाथ…यानी महिमा हाथ की

भा रतीय मनीषियों ने हाथों का प्रतीकार्थ और उसका आध्यात्मिक महत्व बहुत पहले जान लिया था इसीलिए "प्रभाते करदर्शनम्" जैसे आत्मानुशासन की व्यवस्था की। वे हाथ, जो हमारे भाग्यविधाता हैं, उनकी स्तुति दर्शनमात्र से हो जाती है। मनुष्य के हाथों में ही
 
अजित वडनेरकर
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सैनिक सन्यासियों का स्वरूप/आस्था का अखाड़ा-2

देशभर में दशनामियों की कुल 52 मढ़ियां हैं जो शंकराचार्यों की चारों पीठों द्वारा नियंत्रित हैं। सर्वाधिक 27 मठिकाएं गिरि दशनामियों की है शंकराचार्य ने दशनामी परम्परा को महाम्नाय के अनुशासन से बांधा। आम्नाय का अर्थ है रीति, वैदिक ज्ञान, पुण्य-प्रेरित
 
अजित वडनेरकर
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[नामपुराण-11] घुड़दौड़ वाले वाजपेयीजी

दे वीप्रसाद चट्टोपाध्याय अपनी पुस्तक लोकायत में वाजपेय का रिश्ता अन्न और पेय से जोड़ते हैं। वाजपेय यज्ञ सोमयज्ञ की श्रेणी में आता है। अपने सरल रूप में वाजपेय जैसे अनुष्ठान का रिश्ता अन्न और पेय से ही है। अन्न उत्पादन और कृषि उत्पादन कार्यों के संदर्भ में
 
अजित वडनेरकर
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[नामपुराण-10] वाजपेयीजी की गति, जोश और शक्ति

ब्राह्मणों के चिर-परिचित उपनामों या कुल गोत्रों में एक वाजपेयी भी है। इसे बाजपेई , बाजपायी भी लिखा जाता है किन्तु सही रूप वाजपेयी ही है। वाजपेयी उपनाम भी ज्ञान परम्परा से जुड़ा है और इसका रिश्ता वैदिक संस्कृति के एक प्रमुख अनुष्ठान वाजपेय यज्ञ से है जो
 
अजित वडनेरकर
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[नामपुराण-9] पुरोहित का रुतबा, जादूगर की माया

पिछली कड़ियां-1.नाम में क्या रखा है 2.सिन्धु से इंडिया और वेस्ट इंडीज़ तक 3.हरिद्वार, दिल्लीगेट और हाथीपोल 4. एक घटिया सी शब्द-चर्चा 5.सावधानी हटी, दुर्घटना घटी 6.नेहरू, झुमरीतलैया, कोतवाल, नैनीताल 7.दुबे-चौबे, ओझा-बैगा और त्रिपाठी-तिवारी 8.यजमान का जश्न
 
अजित वडनेरकर
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[नाम पुराण-8] यजमान का जश्न और याज्ञिक

प्रा चीनकाल में ज्ञान परम्परा से जुड़ी बातें धर्म के दायरे में आ जाती थीं। अधिकांशतः यह होता रहा कि धर्म-कर्म की जानकारियां ही किसी व्यक्ति के ज्ञान का पैमाना होती थीं। प्राकृतिक शक्तियों को ही मनुष्य ने विकास के प्रारम्भिक चरण से आजतक सर्वोपरि माना।
 
अजित वडनेरकर
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रासलीला और रहस का रहस्य

प्रा चीन संस्कृति में प्रेम की उदात्त अभिव्यक्ति होती थी। कृष्ण की रासलीला इसका प्रतीक है। भक्तिकाव्य में रासलीला शब्द का खूब प्रयोग हुआ है। दरअसल रास एक कलाविधा है। प्रेम और आनंद की उत्कट अभिव्यक्ति के लिए कृष्ण की उदात्त प्रेमलीलाओं का भावाभिनय ही
 
अजित वडनेरकर
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१३ अप्रैल बैसाखी १९१९ को जलियाँवाला बाग के इस प्रांगण में

१३ अप्रैल बैसाखी १९१९ को जलियाँवाला बाग के इस प्रांगण में गोलियाँ खाकर बलिदान हुई हुतात्माओं को शत शत प्रणाम।Memorial SymbolDescription© डॉ.कविता वाचक्नवी/Dr. Kavita Vachaknavee
 
कविता वाचक्नवी Kavita Vachaknavee
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अभिव्यक्ति उत्सव - ब्लॉग जगत में दो माह

मैं… जब भी कुछ मह्सूस किया, आदतन उसे सामने पड़े किसी भी काग़ज़ के टुकड़े पर, या अखबार के किसी कोरे हाशिये पर, नज़्म की शक्ल में लिखा, दोहराया, कुछ दिन सम्भाला और फिर कहीं किसी कोने में रखकर भूल गया. लगा जैसे मन की बात को पर लग गये और जज़्बात के परिंदे उड़कर
 
SAMVEDANA KE SWAR
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गुड़ी पड़वा और नवसंवत्सर

  नववर्ष शुभ हो…  स नातन भारतीय संस्कृति में चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से नववर्ष माना जाता है। इसे संवत्सर प्रतिपदा भी कहते हैं। मान्यता है कि इसी दिन से सृष्टि का आरम्भ हुआ था। सिन्धी समाज का प्रख्यात पर्व चेटिचंड भी वर्ष प्रतिपदा के अगले दिन शुरू
 
अजित वडनेरकर
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बुढापे की चिंता

हर व्यक्ति को अपने बुढापे की चिंता होती है, जाहिर है मुझे भी है। सारी जिंदगी तो हम विदेश मे नही रह सकते है ना, कभी ना कभी तो वापस अपने वतन लौटना ही होगा। बच्चों की जिम्मेदारी ने निबटने के बाद, जीवन संध्या मतलब बुढापे मे तो हम चाहेंगे कि हम अपने हम उम्र
 
Jitendra Chaudhary
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गणतंत्र के अक्षुण रहने व समर्थ बनने/ बनाने हेतु

!!भारत के सभी वीरगति पाए महानायकों व संस्कृति पुरुषों की स्मृति !! को !! विनम्र प्रणाम !! गणतंत्र दिवस पर भारतीय गणतंत्र के अक्षुण रहने व समर्थ बनने/ बनाने हेतु शुभकामनाएँ. लम्बे समय बाद नेट पर बैठ कर कुछ संवाद का सुयोग हो पाया है. वस्तुतः ३१ दिसंबर से
 
कविता वाचक्नवी Kavita Vachaknavee
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आज किसी ने बताया नहीं, कि बसंत पंचमी है

मुझे पता था आज बसंत-पंचमी है। पर न जाने क्यों लग रहा था कि आज बसंत पंचमी नहीं है। शायद मैं सोच रहा था कि कोई आए और मुझ से कहे कि आज बसंत पंचमी है। लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। अक्सर इन त्योहारों का महिलाओं को खूब ध्यान रहता है। पत्नी शोभा मेरे बिस्तर से उठने
 
दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi
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शुभ कामनाएं

हिन्दु नव वर्ष २०६५ की हार्दिक शुभ कामनाएं !
 
Praney !
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रचना की भूमि पर आलोचना की पहली आँख

पिछले दिनों एक सेमिनार में तंकमणि अम्मा, अमिका, वनजा,सुधा आदि से भेंट हुई। उस दिन हम सब ख़ूब हँसे.... और साथ में बहुत कुछ मज़े लिए। उन क्षणों की अनुभूति सभी के नाम करते हुए- खिल खिल खिल हँसती एक की दूसरी चोटी गूँथती बालों को लड़ाती ठिठोली करती सहसा य
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शरद पूर्णिमा का चाँद !

कल रात चाँद पूरी तरह दहक रहा था. और दहकता भी क्यों नहीं, आखिर शरद पूर्णिमा का चाँद था. वो भी भला हो बिजली विभाग का जिस ने एक डेढ़ घंटा बिजली गुल कर पूर्णिमा की चांदनी का आनंद दिलवा दिया. बीच बीच में छोटे मोटे बादल भी चंद्रमा के साथ आँख मचोली खेलते रह
 
Praney !
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इलाहाबाद में विजयपर्व

इलाहाबाद में विजय पर्व मनाने का अंदाज अनूठा है। देश के दूसरे हिस्सों में रामलीलाएं खेलने और रावण के पुतला दहन का रिवाज है, तो इलाहा  बाद में रामलीला के अलावा दशमी तक अलग-अलग जगहों में रोशनी सजाकर रामदल निकालने की परम्परा है। चर्तुथी से ही ऐसे दल
 
इलाहाबादी अडडा
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आज 21 जून फादर्स डे – जून का तृतीय रविवार

आज ‘फादर्स डे’ (Fathers’ day) है । मदर्स डे की भांति यह भी पश्चिम से अपने देश में आयातित एक और पर्व-दिवस है, और उसी की तरह हालिया डेड़-दो दशकों में देश के मध्यम तथा उच्च वर्गीय शहरी नवयुवाओं में लोकप्रिय हो चला है । इसे क्यों और कैसे मनाया जाए ज
 
योगेन्द्र
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रावण-राज में घटी एक विस्मयकारी घटना

यह घटना राष्ट्रीय एकता के सूत्र को उजागर करती है अतः राष्ट्रवादियों को ही नहीं, हर सच्चे मुस्लिम हितैषी को पढ़ना चाहिए और तुष्टीकरण के समर्थकों को भी. गोधरा के ऐसे संवेदनशील अन्दरूनी क्षेत्र जहाँ एक हिन्दू जाने से बचना ही चाहता हो, रात के दस बजे मुख्य
 
संजय बेंगाणी