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एक बार जरूर जाऊंगा

मुझे हिमालय बहुत आकर्षित करता है। वैसे तो भारत के सभी राज्यों मे, सभी कोनों मे मैं जाना चाहता हूं। लेकिन हिमाचल और उत्तराखण्ड की कुछ जगहें ऐसी हैं जहां मैं गया नहीं हूं। वहां मैं जाना चाहता हूं। चलिये आज आपसे भी ये जगहें साझा कर ली जायें:शुरूआत
 
नीरज जाट जी
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सहस्त्रधारा - द्रोणाचार्य की गुफा

देहरादून से 11-12 किलोमीटर दूर है सहस्त्रधारा। मैं अप्रैल में जब यमुनोत्री गया था तो समय मिलते ही सहस्त्रधारा भी चला गया। यह एक पिकनिक स्पॉट है लेकिन यहां का मुख्य आकर्षण वे गुफाएं हैं जिनमें लगातार पानी टपकता रहता है। यह पानी गन्धक युक्त होता है। नीचे
 
नीरज जाट जी
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तैयार है यमुनोत्री आपके लिए

अब जबकि चारधाम यात्रा शुरू हो चुकी है, शुरूआत यमुनोत्री से की जाती है। ज्यादातर लोग टूर ऑपरेटर से ही बुकिंग कराते हैं। टूर ऑपरेटर भारी भरकम राशि लेते हैं। मुझ जैसों के लिये यह राशि देना बस से बाहर की बात है।खैर, यात्रा हरिद्वार-ऋषिकेश से की जाती है।
 
नीरज जाट जी
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यमुनोत्री में ट्रेकिंग

अक्षय तृतीया जा चुकी है। उत्तराखण्ड में चार धाम यात्रा भी शुरू हो चुकी है। मुसाफिरों और श्रद्धालुओं को घूमने के लिये यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ जैसी जगहों के रास्ते खुल गये हैं। इन जगहों पर अब लोग-बाग आने-जाने शुरू हो गये हैं। जाहिर सी बात
 
नीरज जाट जी
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कभी ग्लेशियर देखा है? आज देखिये

अभी तक आपने पढा कि मैं पिछले महीने अकेला ही यमुनोत्री पहुंच गया। अभी यात्रा सीजन शुरू भी नहीं हुआ था। यमुनोत्री में उस शाम को केवल मैं ही अकेला पर्यटक था, समुद्र तल से 3200 मीटर से भी ऊपर। मेरे अलावा वहां कुछ मरम्मत का काम करने वाले मजदूर, एक चौकीदार और
 
नीरज जाट जी
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जानकीचट्टी से यमुनोत्री

जानकीचट्टी से मैने दोपहर दो बजे के करीब चढाई शुरू कर दी। तारीख थी बीस अप्रैल दो हजार दस। मैं थोडी देर पहले ही आठ किलोमीटर पैदल चलकर हनुमानचट्टी से आया था। थक भी गया था। फिर समुद्र तल से लगभग 2500 मीटर की ऊंचाई पर हवा की कमी भी महसूस होने लगती है।
 
नीरज जाट जी
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हनुमानचट्टी से जानकीचट्टी

20 अप्रैल, 2010। सुबह के साढे नौ बजे मैं उत्तरकाशी जिले में यमुनोत्री मार्ग पर स्थित हनुमानचट्टी गांव में था। यहां से आठ किलोमीटर आगे जानकीचट्टी है और चौदह किलोमीटर आगे यमुनोत्री। जानकीचट्टी तक मोटर मार्ग है और जीपें, बसें भी चलती हैं। बडकोट से
 
नीरज जाट जी
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देहरादून से हनुमानचट्टी

अभी तक आपने पढा कि मैं केदारनाथ के लिये चला था। रास्ते में बुद्धि फिर गयी और मैं यमुनोत्री जाने लगा। देहरादून से बडकोट जाने वाली आखिरी बस निकल गयी थी। अब मैने प्रेस की गाडी से जाने का इरादा बनाया। यह पटेल नगर से रात को बारह बजे चलती है। इसमें वैसे तो
 
नीरज जाट जी
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केदारनाथ और फिर यमुनोत्री

अप्रैल 2010 की 18 तारीख को रात को दस बजे से अगले दिन छह बजे तक मेरी नाइट शिफ्ट की ड्यूटी थी। इस नाइट का मतलब था कि 19 को फ्री, 20 का मेरा साप्ताहिक अवकाश था और 21 तथा 22 की मैने ले ली छुट्टी; देखा जाये तो कितने दिन हो गये? चार दिन। ये चार दिन घुमक्कडी
 
नीरज जाट जी
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गुरुद्वारा श्री नानकमत्ता साहिब

यह गुरुद्वारा उत्तराखण्ड राज्य के ऊधमसिंहनगर जिले में स्थित है। जिले के बिल्कुल बीच में है जिला मुख्यालय और प्रमुख नगर रुद्रपुर। यहां से एक सडक किच्छा, सितारगंज होते हुए खटीमा और आगे टनकपुर जाती है। सितारगंज और खटीमा के बीच में है नानकमत्ता। मैं जब खटीमा
 
नीरज मुसाफिर जाट
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पूर्णागिरी – जहाँ सती की नाभि गिरी थी

वो किस्सा तो सभी को पता ही है – अरे वो ही, शिवजी-सती-दक्ष वाला। सती ने जब आत्महत्या कर ली, तो शिवजी ने उनकी अन्त्येष्टि तो की नहीं, बल्कि भारत भ्रमण पर ले गये। फिर क्या हुआ, कि विष्णु ने चक्र से सती की ’अन्त्येष्टी’ कर दी। कोई कहता है कि 51 टुकडे किये,
 
नीरज मुसाफिर जाट
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छोटा कैलाश- ट्रैकिंग का रोमांच-६

चार जून- चढाई का चौथा दिनचार जून- चढाई का चौथा दिनचार तारीख को हमें नबीढांग जाना था। नबीढांग वो जगह थी जहां से हमें हमारी यात्रा के पहले दर्शन होने थे। नबीढांग में हमें ऊँ पर्वत के दर्शन करने थे। गुंजी से नबीढांग करीब अठारह किलोमीटर का सफर है। गुंजी से
 
दीपान्शु गोयल
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छोटा कैलाश- ट्रैकिंग का रोमांच-५

तीन जून- चढाई का तीसरा दिन- बुद्धि से गुंजीतीसरे दिन हमे बुद्धि से गुंजी तक का सत्रह किलोमीटर का सफर करना था। ये रास्ता पिछले दिनो के मुकाबले आसान था। रोज की तरह से ही हमारा दिन सुबह चार बजे ही शुरु हो गया सुबह की चाय के साथ। उसके बाद जल्दी से तैयार होकर
 
दीपान्शु गोयल
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छोटा कैलाश- ट्रैकिंग का रोमांच-४

दो जून - चढाई का दूसरा दिन- गाला से बुद्धि गाला मे सुबह चार बजे ही हमे चाय दे दी गई। जिससे हम लोग समय से उठ कर तैयार हो सके। इस मामले में मै कुमाऊं पर्यटन के लोगों की सेवा भावना की दाद दूंगा। इतनी ठंड में भी वो हर वक्त हमारी जरुरत को पूरा करने के लिए
 
दीपान्शु गोयल
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छोटा कैलाश- ट्रैकिंग का रोमांच ३

धारचुला से १ जून को छोटा कैलाश का हमार सफर शुरु हुआ। आज के बाद से सभी को सुबह जल्दी उठने की आदत डालनी थी। इसलिए सभी सुबह चार बजे ही उठ गये। नाश्ता करने का बाद सभी को आगे के सफर की जानकारी दी गई। हमारे सफर की शुरुआत ही थोडी मुश्किलो से हुई। दरअसल आज के
 
दीपान्शु गोयल
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छोटा कैलाश- ट्रैंकिग का रोमांच-२

जागेश्वर में शाम को मंदिर के दर्शन के बाद हम घूमने निकले। यहा चारो तरफ देवदार के घने जंगल है जिनमे घूमने का अपना अलग ही मजा है। जंगल में तरह तरह की चिडिया दिखाई दी जिन्हे मैने पहले कभी नहीं देखा था। दिल्ली की गर्मी के बाद जागेश्वर की ठंडक बेहद सुकुन दे
 
दीपान्शु गोयल
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एन डी तिवारी- एक अच्छे नेता या फिर कुछ और भी?

एनडी तिवारी के सेक्स स्कैंडल के खुलासे के बाद यह सवाल लाजिमी है कि तिवारी को अच्छा नेता माना जाए या गंदा इंसान। उनके स्कैंडल के किस्सों पर चटखारे लेकर चर्चाएं हो रही हैं हांलाकि अभी तक ये साफ नहीं है कि उन पर लगे आरोप सही हैं या फिर गलत लेकिन इसके बी
 
पूनम पांडे
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नन्दादेवी राजजात - उत्तराखंड की एक ऐतिहासिक व धार्मिक यात्रा

नन्दादेवी राजजात उत्तराखंड की एक ऐसी ऐतिहासिक धरोहर है, जो भूमि की सांकृतिक विरासत की महक चारों ओर बिखेर देती है। जात का अर्थ होता है देवयात्रा अतः नन्दा राजजात का अर्थ है राज राजेश्वरी नन्दादेवी की यात्रा। यह यात्रा इष्ट देव भूमि में मानव और देवताओं
 
गजेन्द्र बिष्ट
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चन्द्रबदनी - एक दुर्गम शक्तिपीठ

नवरात्र ख़त्म हो गए हैं। इन दिनों जम्मू स्थित वैष्णों देवी हो या हिमाचल वाली ज्वाला देवी आदि, सभी के दरबार में भयानक भीड़ रहती है। लेकिन आज हम आपको एक ऐसी 'शक्ति' के दर्शन कराएँगे जो सुगम होने के साथ-साथ दुर्गम भी है। सुगम तो इसलिए कि मंदिर तक जाने क
 
नीरज जाट जी
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देवप्रयाग - गंगा शुरू होती है जहाँ से

देवप्रयाग से वापस आकर जब मैंने अपने एक बिहारी दोस्त से बताया कि मैं देवप्रयाग से आया हूँ तो वो बोला कि -"अच्छा, तो तू इलाहाबाद भी घूम आया।" मैंने कहा कि नहीं भाई, मैं इलाहाबाद नहीं, देवप्रयाग गया था। बोला कि हाँ हाँ, एक ही बात तो है। इलाहाबाद को प्रयाग
 
नीरज जाट जी
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लैंसडाउन यात्रा - 3

जून 2009, रविवार। दोपहर के दो बजे तय हुआ कि नहाते हैं। अभी तक हमने मुहं तक भी नहीं धोया था। अच्छा, इससे पहले एक बात और। लैंसडाउन के निवासियों को पानी की थोडी कमी रहती है। हर दो दिन बाद मिलिट्री का टैंकर आता है। पानी की सारी पूर्ति इसी टैंकर से होती ह
 
मुसाफिर जाट
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लैंसडाउन यात्रा -1

पहले परिचय - लैंसडाउन उत्तराखंड के पौडी गढ़वाल जिले में है। इसकी समुद्र तल से ऊँचाई लगभग 1500 मीटर है। यहाँ गढ़वाल रेजिमेंट का मुख्यालय भी है। सारा प्रशासन मिलिट्री के ही हाथों में है। क्या देखें - लैंसडाउन में कुछ भी देखने के लिए पहले यहाँ जाना पड़त
 
मुसाफिर जाट
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हरिद्वार-ऋषिकेश की प्रशासनिक सच्चाई

आमतौर पर बाहर से आने वाले लोग हरिद्वार-ऋषिकेश को एक ही जिले में मानते हैं। लेकिन अगर सच्चाई पता चले तो सभी कन्फ्यूज हो जायेंगे। हरिद्वार तो खैर जिला है ही, ऋषिकेश शहर स्थित है देहरादून जिले में, लक्ष्मण झूला क्षेत्र स्थित है टिहरी गढ़वाल जिले में, और
 
मुसाफिर जाट
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"भिटौली": ऊत्तराखण्ड की एक महत्वपूर्ण सामाजिक परम्परा

"भिटौली" शब्द भेंट से बना है जिसका शाब्दिक अर्थ स्थानीय भाषा में मिलने से होता है, जहां तक इस त्योहार का समबन्ध है तो इसमें शादीशुदा लड़्की के मायके वाले अपनी बहन/बेटी को उसके ससुराल में जाकर भेंट (यहां पर यह स्थानीय भाषा के अनुसार मिलने और उपहार देने
 
राजेश जोशी