उत्तम
देश के सुप्रसिद्ध कवि रवीन्द्रनाथ टैगोर को बनावटीपन बिल्कुल पंसद नहीं था। जो चीज सीधी और सरल होती थी, उन्हें अच्छी लगती थी । एक बार उनकी पुत्री की शादी हुई । विदाई के समय उसे बिना साज श्रृंगार के ले जाने लगे । उनके संबंधी उनकी निन्दा करने लगे । इस पर
Feb 03 2010 07:55 PM



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