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लार्ड मैकाले के मानस पुत्रों का षड़यंत्र....................!

जब मैं पहली कक्षा में पढने के लिए स्कूल में भर्ती हुआ तो मुझे याद है, दादाजी ने 60 पैसे में स्लेट और 75 पैसे में बाल भारती पुस्तक और 20 पैसे में पेंसिल का एक डिब्बा दिलाया था। पेंसिल तो और भी लाई गयी, एक दो स्लेट भी लगी होगीं क्योंकि फ़ूट जाती थी। इस तरह
 
ललित शर्मा
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सार्वलौकिक उच्च शिक्षा अधिनियम आवश्यक

सार्वलौकिक उच्च शिक्षा अधिनियम आवश्यक राजस्थान के सभी विश्वविद्यालयों को एक सार्वलौकिक विधि के अन्तर्गत लाया जाना चाहिए। प्रत्येक विश्वविद्यालय के लिए पृथक अधिनियम प्रशासनिक जटिलता बढ़ाते एवं कई विसंगतियाँ उत्पन्न करते है।जब किसी भी प्रकार का व्यवसाय
 
Kiran Maheshwari