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बह गया बहिश्त!

बहुत साल पहले, कहीं दूर, एक छोटा सा टापू था, करु नाम का, जिसके निवासी बहुत ही सुखी थे। उनके टापू में सभी आवश्यक चीजें थीं -- भोजन के लिए नारियल के पेड़, जिनके फलों का मीठा जल उनकी प्यास भी बुझाता था, छाया के लिए विशाल टोमानों वृक्ष, मछलियों से भरा समुद्र,
 
बालसुब्रमण्यम
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थिमक्का ने गोद लिए बरगद के पेड़

निस्संतान दंपति बच्चे गोद लेते हैं। पर कर्णाटक की रहनेवाली थिमक्का ने बरगद के पेड़ गोद लिए। वह भी एक-दो नहीं पूरे दो सौ चौरासी। यह आज से पचास साल पहले की बात है। थिमक्का और उसके पति बिक्कालू के कोई बच्चे नहीं थे। उन पर सब ताने कसते। आखिर तंग आकर थिमक्
 
बालसुब्रमण्यम
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पेड़ प्रकृति के वातानुकूलक

पेड़ प्रकृति के वातानुकूलक हैं। एक पेड़ प्रति दिन 400 लिटर पानी हवा में उत्सर्जित करता है, जिससे उतनी ठंडक पैदा होती है जितनी 2500 किलोकेलरी प्रतिघंटा की क्षमता वाले 5 वातानुकूलकों के 20 घंटे निरंतर चलने से पैदा होती है। संवहनी हवाओं के चलते रहने और पत
 
बालसुब्रमण्यम