राष्ट्र प्रेम को समर्पित मेरी एक और कविता
मेरे लिया तो प्रेम ईश्वर, राष्ट्र, समाज और मित्र सबमे हैं . प्रेम का हर भाव मुझे ईश्वर की देन लगता हैं क्योंकि हमारे व्यक्तिगत प्रेम में तो स्वार्थ भरा होता हैं . आज कुछ ईश्वर प्रेम ने राष्ट्र को समर्पित ये कविता लिखने को उत्साहित किया . शुरू में थोडा
Jun 08 2010 09:06 PM



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