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ईश्वर एक बड़ी सुविधा है – हरीशचन्द्र पाण्डे की कविताएं

अभी ‘इतिहास बोध’ में हरिशचन्द्र पाण्ड़े की कविताओं से गुजरना हुआ। छोटे कलेवर की तीन बेहतरीन कविताओं को यहां साभार प्रस्तुत कर रहा हूं। शायद पसंद आएं। ईश्वर एक बड़ी सुविधा है देवता पहला पत्थर आदमी की उदरपूर्ति में उठा दूसरा पत्थर आदमी द्वारा आदमी के लिए उठा
 
रवि कुमार, रावतभाटा
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पुरानी डायरी से - 13: 'ईश्वर' नहीं

__________________________________________________________भठ्ठर मन, सर्व व्यर्थता बोध - कुछ लिखा नहीं जा रहा। पुरानी डायरी की शरण गया तो पंजाब आतंकवाद के चरम के समय की यह कविता दिख गई। यह वह दौर था जब ईश्वर से मोहभंग हो रहा था। मनुष्य की सारी समस्याओं की
 
गिरिजेश राव
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ईश्वर लीला

(हरिभूमि अखबार की कतरन)
 
Ek ziddi dhun
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ईश्वर इक अवधारणा मात्र

अब गुलजार सिंह के बेटे अभय के गुजरे हुए ५ वर्ष होने को आये, और आज भी इनकी आखों में वही नमी है| ये बहुत चाह के भी अपने बेटे को भुला नही पा रहे और कोई भुलाये भी कैसे , उसकी उम्र ही क्या थी १९-२० वर्ष का ही तो था वो| परन्तु आज इन्हें अपनी गलती का ऐहसास है
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हम क्यों मानते हैं ईश्वर को ?

समय के साथ-साथ हम मानवों में सोचने की शक्ति भी विकसित हुई। सबसे पहले हमें यह ज्ञान हुआ कि इस सृष्टि की रचना के पीछे कोई अदृश्य शक्ति है और इसका संचालन भी उन्हीं के हाथों में है। मानव के एक समूह ने उस शक्ति को 'ईश्वर' या 'प्रभु' का नाम दिया, तो दूसरे
 
डा.मान्धाता सिंह
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