ई मेल क्या कह रही हैं ? (अविनाश वाचस्पति)
ई मेल को मत मानें सत्य वचनइनमें भी मिलावटी माल पक रहा हैचाहे इस पके से नहीं हो रहा नुकसानपर मिलावट खुद ही जुर्म है श्रीमान।दैनिक हिन्दी नवभारत टाइम्स से साभार
Apr 18 2010 12:11 PM



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