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मैं, मेरा दोस्त, कॉफ़ी और इलाहाबादी जोड़े : दो दृश्य

जो लोग मेरा ब्लॉग पिछले कुछ दिनों से पढ़ रहे हैं, उन्हें ये टॉपिक अटपटा ज़रूर लगेगा, पर मैं उन्हें आश्वस्त कर दूँ कि अम्मा-पिताजी पर मेरी श्रृँखला आगे की पोस्ट में चलती रहेगी. ये विषय परिवर्तन दरअसल, न्यायालय के एक फ़ैसले और एक विवादित फ़िल्म पर आजकल चल
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कुछ समय शहीद चन्‍द्र शेखर उद्यान में

अमर शहीद चन्‍द्र शेखर आजाद उद्यान (कम्‍पनी बाग) के एक हिस्‍से के कुछ चित्र
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गधा सम्मेलन स्थल से प्रथम अनोपचारिक रिपोर्ट

बहुत तेज गति से चलते हुये ताऊ और रामप्यारी उज्जैन गधा सम्मेलन स्थल तक पहुंच गये हैं. चारों तरफ़ गधे और गधियों की बहार ही बहार आई हुई है. देश विदेश से नाना प्रकार के गधे और गधियां इसमे शिरकत करने आये हुये हैं. कुछ ही समय मे सम्मेलन शुरु होजायेगा. रामप
 
ताऊ रामपुरिया
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लो ! हम भी एक ठो पोस्ट कबाड लिए इलाहाबाद ब्लॉगर गोष्ठी के नाम पर

इलाहाबाद ब्लॉगर गोष्ठी से एक बात तो जाहिरा तौर पर हालिया हजामत / फ़ेसिअल प्राप्त मुंह की तरह साफ़ हो गई है कि एक ब्लॉगर और कुछ बर्दाश्त करे या नहीं इ बर्दाश्त नहीं कर सकता कि कोई उसे ब्लॉगिंग की तमीज सिखाने की कोशिश करता नजर आए । चाहे वह ब्लॉगिंग का
 
अर्कजेश
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इति श्री इलाहाबाद ब्लागर संगोष्ठी कथा

इलाहाबाद ब्लागर संगोष्ठी सम्मेलन की लानत-मलानत अपने आखिरी दौर में है। मामला आखिरी सांसें ले रहा है। आई.सी.यू. में है। कभी भी दम तोड़ सकता है। इससे पहले कि मामला आखिरी सांस ले, सोचते हैं कि हम भी इसके अंतिम दर्शन कर लें। बाद में तो फ़ोटुयें रह जायेंगी
 
फ़ुरसतिया
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इलाहाबाद चिट्ठाकार सम्मेलन के कुछ हा हा ही ही , हाय हैलो के ऑडियो - वीडियो

आइए, आग को कुछ और हवा दें. दूर-सुदूर प्रांतों-देशों में कान-नाक-मुँह खोलकर अपने कम्प्यूटर के सामने चिंतित होकर ब्लॉगियाती-टिपियाती जनता के लिए, कि इलाहाबाद में क्या क्या न हुआ और क्यों न हुआ और हुआ तो क्यों हुआ इत्यादि के
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पुल के उस पार से: इलाहाबाद दर्शन

जाने कितना नुकसान कर बैठा मैं हिन्दी साहित्य का इन पिछले चार दिनों में मात्र. सब माफ कर देंगे, सब मेरे अपने हैं मगर नहीं माफ करेगा मुझे तो हिन्दी साहित्य का इतिहास. वो मुझसे वैसे भी नहीं सध पाता. न जाने क्या क्या निबंध, आलेख, शोध पत्र, संस्मरण आदि लि
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नामवर के होने का अर्थ

नामवर को जानो भाई जब 17 अक्टूबर की शाम में नामवर जी से फोन पर बात हुई थी तो यह तय हुआ था कि मैं और वे 23 अक्टूबर को इलाहाबाद में गले लग कर भेटेंगे । भेटने का प्रस्ताव मेरा था जिसे नामवर जी ने भावुकता भरे स्वर में स्वीकार कर लिया था। यह भेटना औपचारिक
 
बोधिसत्व
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चिट्ठाकारी (हिन्दी?) में निहित ख़तरे…

इलाहाबाद में मैंने अपनी प्रस्तुति में चिट्ठाकारी में निहित खतरों के बारे में भी बताया था. अभिषेक ओझा ने कई पोस्टों में ब्लॉगिंग के खतरे के बारे में विस्तृत विवरण दिए हैं. इनमें से एक है – अनर्गल, व्यक्तिगत आक्षेप . यह टिप्पणी सुरेश चिपलूणकर के चिट्ठे
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इस तरह हम भी पहुंचे हिंदी चिट्ठाकारी की दुनिया - राष्ट्रीय संगोष्ठी में

ज बसे सत्यार्थमित्र वाले सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी   और संयोजक संतोष भदौरिया का इ-निमंत्रण पत्र आया था , उसके  पहले ही हम पूरी तरह से अपना बस्ता (प्राइमरी का मास्टर और क्या ले जाता?) तैयार करके आयोजन में शामिल होने को तत्पर थे | पहले सोचा कि
 
प्रवीण त्रिवेदी ╬ PRAVEEN TRIVEDI
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......और अब बची खुची भी ! चिट्ठाकारी की दुनिया की एक अर्ध दिवसीय रिपोर्ट !

दूसरे दिन का सत्र तो शुरू होना था १०.३० पर मगर शुरू हो पाया ११.३० बजे ! प्रियंकर जी सत्र अध्यक्ष बने ! वक्ता ,मसिजीवी ,गिरिजेश राव ,विनीत ,हेमंत कुमार ,हिमांशु और मैं !संचालक रहे इरफान ! यह सत्र अध्यक्षीय अनुशासन और कुशल संचालन से देर से शुरू होने के
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इलाहाबाद के कुछ लफ़्फ़ाज किस्से

और इस तरह इलाहाबाद में ब्लागर संगोष्ठी संपन्न हुई। शानदार अनुभव हुये। लोगों से मिले-मिलाये। घूमे-घुमाये। गपियाये। हंसे-ठठाये। लौट के आये। अब आप इसे हमारी बेशरमी कहें या संवेदनशीलता या फ़िर हमारे लिये किये गये तथाकथित शानदार वीआईपी टाइप इंतजाम की कृप
 
फ़ुरसतिया
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इलाहाबाद से 'इ' गायब (चर्चा हिन्दी चिट्ठो की )

अंक : 59 प्रस्तुतकर्ता : डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"   ज़ाल-जगत के सभी हिन्दी-चिट्ठाकारों को डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" का सादर अभिवादन!
 
डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
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बेनामियों के मारे ब्लॉगर बेचारे

ऐतिहासिक शहर इलाहाबाद में संपन्न हुई दो दिनी 'ब्लॉगर मीट' (कुछ लोगों को इस शब्द पर आपत्ति है) के दौरान वैसे तो बहुत कुछ उल्लेखनीय हुआ। लेकिन मेरे खयाल से इस संगोष्ठी को सबसे ज्यादा याद किया जाएगा अराजकता के लिए। अराजकता का आलम यह था कि संगोष्ठी के लि
 
रवीन्द्र रंजन
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इलाहाबाद से 'इ' गायब, भाग -1

प्रयाग ब्लॉगर सम्मेलन (जी हाँ ब्लॉगरी में इलाहाबाद को प्रयाग कहने वालों के लिए भी जगह है।) के बारे में सोचा था कि नहीं लिखूँगा लेकिन बहुत बार अपना सोचा नहीं होता। (पहला दिन)   हिन्दुस्तानी एकेडमी के सभागार में प्रेमचन्द, निराला, राजर्षि टंडन और
 
गिरिजेश राव
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ब्लागर उवाच -प्रयाग की चिट्ठाकारिता संगोष्ठी

बावजूद कुछ बदइन्तजामियों और बदतमीजियों के विचार स्पंदन की लिहाज से संगोष्ठी जीवंत बनी ! कई विचार बिंदु ऐसे आये कि बकौल मीनू खरे जी की "बात निकलेगी तो फिर दूर तलक जायेगी " कुछ चिंतनशील ब्लागरों की आवाज थी कि एक 'इलाहाबाद घोषणा जैसा कुछ दस्तावेज जारी क
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तो इस तरह खत्म हुआ इलाहाबाद का ब्लॉग मंथन

ब्लॉग-विमर्श के लिहाज से पहले दिन के मुकाबले दूसरे दिन के सत्र ज्यादा कारगार लगे। इसकी एक वजह तो समय से सत्र का शुरु होना रहा,अधिक वक्ताओं के विचार आए लेकिन इसके साथ ही तकनीकी सत्र में जिस बारीकी से रविरतलामी,मसिजीवी,ज्ञानदत्त पांडेय और संजय तिवारी न
 
विनीत कुमार
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इलाहाबाद से बदलाव के संकेत

हिंदी ब्लॉगिंग पर 2 दिन की राष्ट्रीय संगोष्ठी में शामिल होने के लिए इलाहाबाद आया हूं। ब्लॉगिंग पर कुछ खट्टा-कुछ मीठा टाइप की चर्चा हुई। कुछ खुश हुए कुछ खुन्नसियाए। सबकी अपनी जायज वजह थी। लेकिन, हमको तो भई बड़ा मजा आया। अपने शहर में 2 दिन रहने का भी म
 
हर्षवर्धन
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इलाहाबाद से लौट कर :कुछ खरी कुछ खोटी और कुछ खटकती बातें !

बस अभी अभी लौटा हूँ बनारस ! ब्लागिंग धर्म का तकाजा कि कुछ टिपियाँ भी दूं ! भाई लोग टिपिया टिपिया थक चुके हैं  ! उन्हें ज़रा रिलीव भी कर दूं ,फुरसतिया  कर दूं ! मैं यहाँ सक्षिप्त  सूत्र वाक्यों में ही चर्चा करूगां. नामवर ने चिट्ठे शब्द
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ब्‍लागरों की ब्‍ला-ब्‍ला

जानबूझकर दूर रखे गये हिन्दूवादी ब्लागर ! ‍‍ हिन्‍दूवादी ब्‍लागरों को दूर रखकर आयोजक सेमिनार को साम्‍प्रदायिका के तीखे सवालों पर जूझने से तो बचा ले गये लेकिन विवाद फिर भी उनसे चिपक ही गये। सेमिनार से हिन्‍दूवादी या, और भी साफ शब्‍दों में कहें तो धार्म
 
इलाहाबादी अडडा
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इलाहाबाद में हिंदी ब्लॉगिंग और पत्रकारिता पर चर्चा

महात्मा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय और हिंदुस्तानी एकेडमी इलाहाबाद की ओर से आयोजित राष्ट्रीय ब्लॉगर संगोष्ठी का पहला दिन कल बेहद शानदार रहा। देश भर के ब्लॉग लिक्खाड़ इस चर्चा में शामिल हुए। चर्चा के दौरान रवि रतलामी जी के सौजन्य से
 
हर्षवर्धन
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चिट्ठाकारी की राष्ट्रीय संगोष्ठी: कुछ यादगार तस्वीरें

हिन्दुस्तानी एकेडेमी सभागार में आयोजित गोष्ठी का उद्घातन सत्र बहुत ही भव्य, सुरुचिपूर्ण और सुव्यवस्थित ढंग से सम्पन्न हो गया। महात्मा गांधी अन्तरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय वर्धा और हिन्दुस्तानी एकेडेमी, इलाहाबाद द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित इस दो
 
सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी
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ब्लागर समारोह का उद्घाटन और सत्यार्थ मित्र का विमोचन

और ये शानदार टाइप उद्घाटन हो गया। नामवर जी दीप जला चुके हैं। ज्ञानजी विषय प्रवर्तन कर चुके। रवि भाई ब्लाग की जानकारी दे चुके। अजित भाई सत्यार्थ मित्र के बारे में बता चुके। किताब विमोचित हो चुकी। किताब के बारे में दो लोग बता चुके यह कहते कि उन्होंने
 
फ़ुरसतिया
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हिन्दुस्तानी एकेडमी से लाइव ब्लॉगिंग...

तो भैया ई है जिन्दा बोले तो लाइव रिपोर्टिंग हिन्दुस्तानी एकादमी से। कल शाम ही रविरतलामी और अजित भाई आ गये हैं। रात कुछ और लोग आये और सुबह तमाम नामी गिरामी आये। कुछ फ़ोटो सोटो देखा जाये ताकि अन्दाज हो सके कि का गुल खिला रहे हैं ब्लागर भाई। कोशिश तो यह
 
अनूप शुक्ल