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रंगपंचमी-इन्दौर की विश्व-विख्यात गेर;जहाँ कोई नहीं ग़ैर.

मेरे शहर इन्दौर में अभी तक होली का ख़ुमार उतरा नहीं है. होली के बाद भी रंगों की मार ,आत्मीयता कीबहार ,पकवानों की महक ,भंग का नशा अभी तक यहाँ जारी है क्योकि होली का बाद होली का एक और विस्तार रंगपंचमी के रूप में पूरे मालवा और निमाड़ अंचलों में पूरी धूमधाम से
 
शब्द-निधि
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आज पूरे साठ के हो गये हैं शायर डॉ.राहत इन्दौरी.

वो अब भी इक फ़टे रूमाल पर ख़ुशबू लगाता है !यक़ीनन हमारे राहत भाई ऐसे ही हैं. उर्दू शायरी का परचम उठा कर वे पूरी दुनिया में घूमते हैं;महंगे एयरलाइन्स में सफ़र करते हैं,सात सितारा होटलों में ठहरते हैं,रईस मेज़बानों के मेहमान होते हैं लेकिन अपने अतीत के उस फ़टे
 
sanjay patel
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रामजी के खेत से रामजी की चिड़िया

कुछ एक दिन पहले मुझे इन्दौर के श्री संजय रामेश्वर पांचालजी का ईमेल प्राप्त हुआ. साथ में राजस्थान पत्रिका में छपे समाचार भी संलग्न था. उन्होने लिखा था, “पिछ्ले दिनों मेरे परिवार के सामने कुछ पक्षियों की मौतें बिजली विभाग की लापरवाही से हो रही है
 
संजय बेंगाणी