चिड़ीमारों के देश में
बड़े सवेरे निकलता हूँ और देर से घर पहुंचता हूँ सो गौरय्या को लेकर जो हाय-तौबा , उट्ठा-पटक मची हुई थी उस पर यकीं न होते हुए भी चुप था । आज मौक़ा मिल गया और सवेरे सात बजे ये तस्वीरें मैंने अपने आँगन में खुद खेंची हैं । ध्यान से देखें गौरय्या ही है न
Apr 01 2010 11:08 PM



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