पसंद करें
4
नापसंद करें

चिड़ीमारों के देश में

बड़े सवेरे निकलता हूँ और देर से घर पहुंचता हूँ सो गौरय्या को लेकर जो हाय-तौबा , उट्ठा-पटक मची हुई थी उस पर यकीं न होते हुए भी चुप था । आज मौक़ा मिल गया और सवेरे सात बजे ये तस्वीरें मैंने अपने आँगन में खुद खेंची हैं । ध्यान से देखें गौरय्या ही है न
 
मुनीश ( munish )