पसंद करें
0
नापसंद करें

माँ की दुआ नहीं मिलती

शायिर: वक़ील ख़ान 'बेदिल' (सम्भल)हर किसी को वफ़ा नहीं मिलतीदर्दे-दिल को दवा नहीं मिलतीकैसा इंसाफ़ है ज़माने काज़ालिमों को सज़ा नहीं मिलतीवो बड़े बद्-नसीब होते हैंजिनको माँ की दुआ नहीं मिलतीनुख़्ले-उल्फ़त1 जहाँ पनपता होकहीं ऐसी फ़ज़ा नहीं मिलतीहाय ऐ दौरे-नौ2 तेरा
टैग: इंसाफ़
पसंद करें
0
नापसंद करें

जब चमक उट्ठे तेरी याद के जुगनू कितने

शायिर: बेदिल संभली------------------------जब चमक उट्ठे तेरी याद के जुगनू कितनेख़ून बन-बनके गिरे आँख के आँसू कितनेग़मे-दौराँ, ग़मे-जानाँ, ग़मे-हस्ती ऐ दोस्तएक है जान मेरी और हलाकू कितनेवो जो बढ़-बढ़के बग़लगीर हुआ करता हैघोंप ही देगा मेरी पीठ में चाकू
टैग: इंसाफ़