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माँ की दुआ नहीं मिलती
शायिर: वक़ील ख़ान 'बेदिल' (सम्भल)हर किसी को वफ़ा नहीं मिलतीदर्दे-दिल को दवा नहीं मिलतीकैसा इंसाफ़ है ज़माने काज़ालिमों को सज़ा नहीं मिलतीवो बड़े बद्-नसीब होते हैंजिनको माँ की दुआ नहीं मिलतीनुख़्ले-उल्फ़त1 जहाँ पनपता होकहीं ऐसी फ़ज़ा नहीं मिलतीहाय ऐ दौरे-नौ2 तेरा
Aug 31 2009 12:24 PM



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