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स्लैमबुक और उसकी मानसिकता

कुछ दिन पहले बठिंडा से मेरे घर अतिथि आए थे, वो मेरे खास अपने ही थे, लेकिन अतिथि इसलिए क्योंकि वो मुझे पहले सूचना दिए बगैर आए थे, और कमबख्त इस शहर में कौएं भी नहीं, जो अतिथि के आने का संदेश मुंढेर पर आकर सुना जाएं। वो आए भी, उस वक्त जब मैं बिस्तर में था,
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कितना बदल गया इंदौर-2

"ऐसा हैगा. अपन तो शहर के बाहर का हैं. पर आप जिनी रोड पर चली रिया हो उन्हीं पे नाक की सीध में सीद्दा निकल जाओ. एबी रोड आ जावेगो."कानों में मिश्री की तरह घुलती मालवी. अनजाने होकर भी उस अजनबी ने दिल जीत लिया. बात सही तो कही. अगर नाक की सीध में चलते रहोगे तो
 
अखिलेश शर्मा
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कितना बदल गया इंदौर-1

सर्राफ़े की गलियाँ, राजबाड़ा का आँगन सब कुछ है. सुबह-सुबह मंदिर की घंटियाँ हैं.सड़कों के किनारे लगे फूलों के ढेर हैं. अगरबत्तियों की खुशबू है. घर के बाहर ताज़ी सब्ज़ियों की आवाज़ लगाते मोबाइल वेजीटेबल शॉपकीपर. जिनके ठेलों पर मंडियों से आए ताज़े टमाटर,
 
अखिलेश शर्मा
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इंदौर ज्योतिष सम्मेलन:23-24 जनवरी

जय श्री राम ............ | सोच तो यह रखा था कि कल सुबह नई रिलीज़ फ़िल्मों की बात रखने के बाद शाम तक आप से फिर रू-ब-रू होंगे इंदौर ज्योतिष सम्मेलन की बात रखने,मगर यह हो न सका | कारण रहा इंटरनेट का साथ नहीं देना | लेकिन कोई बात नहीं,हम अब आप के साथ हैं |
 
Dr.KUMAR GANESHE 369
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बस याद है एक होली...

हरियाणा के रतिया शहर की बात है....जब घर में से रंग उठाकर मजाक मजाक में अपनी भाभी पर डाल दिया, जिसकी उम्र समय समय करीबन 27 की होगी, और मेरी करीबन दस ग्यारह की. उसके बाद करीबन सुबह ग्यारह बजे से शाम चार बजे तक वो मुझ पर रंग गिराती रही, क्योंकि उनकी होल
 
कुलवंत हैप्पी
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चित्रकार श्रेणिक जैन मीरा कला सम्मान से सम्मानित

यह सचमुच चकाचौंध और बड़बोलेपन से दूर रहने और चुपचाप अपनी कला रचने वाले कला साधक का सम्मान था। और इसके साक्षी थे शहर के तमाम नए-पुराने कलाकार और फाइन आर्ट कॉलेज के छात्र। मौका था देवलालीकर कला वीथिका में मंगलवार की शाम वरिष्ठ चित्रकार श्रेणिक जैन को म
 
ravindra vyas
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