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आज़ादी जिसका नाम है उसमे यह सब शामिल है -

आज़ादी जिसका नाम है उसमे यह सब शामिल है -मिलने-जुलने की आज़ादी,रुपये -पैसे की आज़ादी,घर-गृहस्थी की आज़ादी,सरकार बनाने की आज़ादी,सोचने-विचारने की आज़ादीऔरआत्मिक आज़ादी ।एक भी न हो, इन में से तोआज़ादी,आज़ादी नहीं,ग़ुलामी है ।- महात्मा
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शहीद तेरे नाम से...

बरसों पुरानी बात बताने जा रही हूँ...जिस दिन भगत सिंह शहीद हुए,उस दिन का एक संस्मरण...सुबह्का समय ...मेरे दादा-दादी का खेत औरंगाबाद जानेवाले हाईवे को सटके था...दादा दादी अपने बरामदे में शक्ल पे उदासी, ज़ुबाँ पे मौन लिए बैठे हुए थे...देखा, लकडी के फाटक से
 
shama
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बिखरे सितारे.!१).एक वो भी दिवाली थी...! ...

क्यों हम किसी की या ख़ुद की ज़िंदगानी किसी के साथ साँझा करना चाहते हैं? क्यों एक दास्ताँ बयाँ करना चाहते हैं? हर किसी के अलाहिदा वजूहात हो सकते हैं...मैं यहाँ किस कारण आयी हूँ, ये बता दूँ.... एक ऐसी दास्ताँ सुनाने आयी हूँ, जो शायद आपको चौंका दे...हो स
 
kshama
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जंगे आज़ादी...

२ अक्टूबर..... गांधी जयंती है..ये कविता उस महात्मा और उसकी और हमारी माँ को समर्पित है .....जवाब उन लोगों को है, जो आज होती/दिखती हर बुराई के लिए गांधी को ज़िम्मेदार ठहरातें हैं...ये तो हर शहीद पे इल्ज़ामे बेवफ़ाई है...चाहे, गांधी हो, भगत सिंग हो या करकर
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इतनी बहस बुर्क़े पर

मैं फिर अपना शेर दोहराता हूँ - न जाने कुफ्र-ओ-ईमां की कहाँ जाकर हदें छूटें, चलो ढूँढें नया कोई अमीर-ए-कारवाँ अपना। ( कुफ्र-ओ-इमाँ - आस्तिकता और नास्तिकता , हदें छूटें - सीमाओं से बाहर आयें, अमीर-ए-कारवाँ - नेतृत्व करने वाला, कारवाँ की अगुवाई करने वाल
 
हर्ष प्रसाद
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