पसंद करें
5
नापसंद करें

टेलीवीजन (या रेडियो) की जरूरत

लम्बे समय से मैने टेलीवीजन देखना बन्द कर रखा है। मैं फिल्म या सीरियल की कमी महसूस नहीं करता। पर कुछ दिन पहले सवेरे जब मैं अपनी मालगाड़ियों की पोजीशन ले रहा था तो मुझे बताया गया कि दादरी के पास लोग ट्रैक पर आ गये हैं और दोनो ओर से ट्रेन यातायात ठप है। [...]
 
Gyandutt Pandey
पसंद करें
3
नापसंद करें

दहेज

वक्र टिप्पणियों का बहुधा मैं बुरा नहीं मानता। शायद मैं भी करता रहता हूं। पर विवेक सिंह की यह पिछली पोस्ट पर वक्र टिप्पणी चुभ गई: “मेरी पत्नीजी के खेत का गेंहूं है।” क्या ! आप अभी तक दहेज लिए जा रहे है ? याद आया अपनी शादी के समय का वह तनाव।
 
Gyandutt Pandey
पसंद करें
0
नापसंद करें

नवान्न

वैशाखी बीत गई। नवान्न का इन्तजार है। नया गेहूं। बताते हैं अरहर अच्छी नहीं हुई। एक बेरियां की छीमी पुष्ट नहीं हुई कि फिर फूल आ गये। यूपोरियन अरहर तो चौपट, पता नहीं विदर्भ का क्या हाल है? नवान्न के बोरे पर बैठी, सहेजती मेरी पत्नीजी और गेंहूं के दाने परखते
 
Gyandutt Pandey
पसंद करें
0
नापसंद करें

'कूल' युवा !

यह लेख मैं मोटोरोला 'युवा' मोबाइल फ़ोन के उस नवीनतम विज्ञापन को समर्पित करना चाहता हूँ जिस में कक्षा में पढ़ा रहे एक शिक्षक का उपहास किया गया है। सदियों पुरानी घिसी पिटी भारतीय (कृपया यहाँ 'इंडिया' पढ़ें) संस्कृति को चमचमाती सुनहरी पन्नी में लिपटी अम
 
Praney !
टैग: आस-पास
पसंद करें
0
नापसंद करें

हमारे गुप्ता जी !

गुप्ता जी हमारे पड़ोस में पिछले वाले ब्लाक में रहते हैं। मेरा अपनी उन से कोई नमस्ते, राम राम नहीं है, परन्तु यदा कदा सुबह अपनी गैलरी में चाय पीते समय मैं उन्हें देख लेता हूँ। कोई पचास के पेटे में गुप्ता जी अनोखे जीव है। मेरी रूचि उन में तब जगी जब एक ब
 
Praney !
टैग: आस-पास
पसंद करें
1
नापसंद करें

वो पुरानी 'सरिता' की कहानी का एक पन्ना

जय बजरंग बली ...और सब खतरे टल गए ...बजरंग बली पे याद आया एक मस्त किस्सा हुआ पिछले दिनों राज -राजेश्वरी नगर, बनारस में ...मेरे आगे वाले नए किरायेदार ने दरवाजा खुला छोड़ दिया तो एक बन्दर शाम को पहले किचेन में घुस गया तो जो लेडी है उन्होंने बच्चों को बे
टैग: आस-पास