एक ज़रूरी काम
मंदी के दौर में अगर वाक़ई कुछ ज़्यादा है, तो वो है काम। कमबख़्त इतना काम है कि इस काम के चक्कर में सारे काम ठप्प पड़े हैं। ब्लॉग को ही लीजिए। कितना ज़रूरी काम है ब्लॉग लिखना। मगर रोज़-रोज़ कहां लिख पाते हैं ? बहरहाल, आज अशोक चक्रधर जी की सभा में ब्लॉ
Mar 17 2009 02:12 PM



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