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बधाई हो - सरकार के साल पूरे.

प्रधानमंत्री महोदय बधाई हो .कुर्सी के खेल में लगातार दूसरी पारी में भी आप बहुत अच्छा खेल रहे हैं. सफ़लतापुर्वक आपकी सरकार ने एक साल पूरे किये. मोहतरमा सोनियांजी के आशीर्वाद से आप देश को स्थिर (गतिहीन) सरकार देने में सफ़ल रहे.पूरे साल नरेगा का नगारा बजता
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साहित्य में आलोचना की अनुपस्थिति ----आलोचना/समालोचना/ त्रुटियाँ .....

एक समय था जब बड़े बड़े साहित्यकार व कवि एक साथ बैठकर एक दूसरे की कविता/रचना सुनते थे एवं समालोचनात्मक विचार विनियम , बहस करते थे |एक दूसरे की कविता में मौजूद कलापक्ष की, भाव पक्ष की, अर्थ -भाव , कथ्य व तथ्यात्मक त्रुटियों को इंगित करते थे, इससे साहित्य ,
 
Dr. shyam gupta
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पुस्तक-चर्चा एवं लोकार्पण समारोह

पुस्तक-चर्चा एवं लोकार्पण समारोह२८ अप्रैल २०१०अपराह्‌न ५ बजेहिन्दुस्तानी एकेडेमी के तत्वावधान में २८ अप्रैल २०१० दिन बुधवार अपराह्‌न 5:00 बजे एकेडेमी के सभागार में पुस्तक-लोकार्पण समारोह का आयोजन किया गया है। जिसमें एकेडेमी की सद्यः प्रकाशित पुस्तकें
 
हिन्दुस्तानी एकेडेमी
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साहित्य में आलोचना --अर्थ दोष ....

" हिचकीनि सौं" -जिसका अर्थ लेखक ने लगाया है---हिचकिचाहट के माध्यम से ; जबकि मेरे ख्याल से यह होना चाहिए - हिचकियों के माध्यम से | आपका ख्याल क्या है?- इसे कहा जाता है --अर्थ दोष , जो आजकल बहुधा कविताओं में पाया जाता है--भाषा का उचित ज्ञान न होने से. .
 
Dr. shyam gupta
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क्रान्तिदूत की चुनौती

"खायी है ईंसानों ने टक्कर ऎसी कि हर दीन के मांथे से लहु जारी है".लेकिन एसी टक्कर क्यों कि ईंसान तडपकर अपनी जान दे दे?भूख और लाचारी से तडपते हुए बार-बार ईश्वर को याद करे,खुदा कि फ़रियाद करे और बदले मे मौत मिले तो ईंसान क्या करे?.किसी के मां-बहन की ईज्जत
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धर्म और फलसफा

थामस मानमुझे चाहे संक्षेप में या फिर ज्यादा विस्तारित स्वरूप में अपने फलसफे अथवा विचारों, या फिर कहें दृष्टिकोण या और बेहतर, जीवन और जगत के बारे में अपनी भावनाओं को अभिव्यक्त करना काफी मुश्किल जान पड़ता है। तस्वीरों और धुनों के माध्यम से अप्रत्यक्ष रूप से
 
रंगनाथ सिंह
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पुस्तक विमोचन : एक दृश्य

वेद प्रकाशएक दलित लेखक की पुस्तक का विमोचन था.महान आलोचक विमोचन के लिए मौजूद थे. प्रकाशक महोदय ने उनका परिचय कराते हुए कहा--'आज हमारे बीच सदी के सबसे बड़े आलोचक विद्यमान हैं, जिन्होंने हिंदी साहित्य को नई दिशा दी है. स्त्रियों और दलितों के योगदान का
 
रंगनाथ सिंह
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सलाखों के पीछे कैद स्वाधीनता

नीलाभइरादा तो आज था कि अभय ने अपने ब्लाग -- निर्मल आनन्द-- में जो सवाल उठाया है : हिन्दी में सितारा कौन है ? -- उस पर कुछ विचार किया जाये, लेकिन आज एक ऐसी बात हुई कि आप से किसी और विषय की चर्चा करने को मन हो आया है.आज हमारी युवा मित्र सीमा आज़ाद और उनके
 
रंगनाथ सिंह
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जटिल रोगों की सहज जानकारी

-डॉ. अशोक प्रियरंजनकनाडा में बसी भारतीय मूल की साहित्यकार स्नेह ठाकुर ने संजीवनी केमाध्यम से लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने का सार्थक प्रयास किया है। इस पुस्तक में उन्होंने विविध रोगों के इलाज और स्वास्थ्य संबंधी परिस्थितियों की जानकारी दी है।
 
dr ashok kumar mishra
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कल्याणकारी पूंजीवादी राज्य, मासकल्चर और साहित्य

        हिन्दी साहित्य में नए मूल्यों और मान्यताओं के प्रति संदेह,हिकारत और अस्वीकार का भाव बार-बार व्यक्त हुआ है। इसका आदर्श नमूना है परिवार के विखंडन खासकर संयुक्त परिवार के टूटने पर असंतोष का इजहार। एकल परिवार को अधिकांश
 
जगदीश्‍वर चतुर्वेदी
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आधुनिककाल का सार्वजनिक वातावरण

आधुनिकाल के आगमन के साथ विभिन्न किस्म के विनिमय रूपों का व्यापक विकास हुआ। परिवारों के बीच में विनिमय। वस्तुओं का विनिमय। वफादारी,आज्ञाकारिता और करवसूली आदि प्रशासन की नीतियों के परिणाम थे। राज्य और जनता के बीच में भी व्यापक विनिमय की प्रक्रिया शुरू हुई।
 
जगदीश्‍वर चतुर्वेदी
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जिंदगी कीसच्चाई को उजागर करती गजलें

-डॉ. अशोक प्रियरंजनडॉ. कृष्ण कुमार बेदिल का यह दूसरा गजल संग्रह हथेली पर सूरज मौजूदा दौर के आम आदमी के अंतर्मन की व्यथा, सामाजिक विसंगतियों, जिंदगी की तल्ख हकीकत, राजनीतिक विद्रूपताओं और नित बदल रहे जीवनमूल्यों से रू-ब-रू कराता है। हुस्न और मुहब्बत जैसे
 
dr ashok kumar mishra
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हिन्दी साहित्य का इतिहास और हाइपरटेक्स्ट की समस्याएं -1-

     हाइपरटेक्स्ट आज हमारे देश की ठोस वास्तविकता है। हमें इसके साहित्यिक परिणामों के बारे में जागरूक बनना चाहिए। हाइपरटेक्स्ट मूलत: कम्प्यूटर रचित पाठ है।  इस पाठ का आधार साहित्यिक गद्य रहा है। जिन लोगों ने हाइपरटेक्स्ट का
 
जगदीश्‍वर चतुर्वेदी
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है कोई जवाब आपके पास ?

अगर महाराष्ट्र को                       अलग राज्य बनाने की माँग उठने
 
रंगनाथ सिंह
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नई पीढ़ी को आईना दिखा कर संबंधों की पड़ताल

-डॉ. अशोक प्रियरंजनआधुनिक समाज में युवक-युवतियों की मानसिकता में व्यापक परिवर्तन आ रहा है। नई और पुरानी मान्यताओं, परंपराओं, विचारधाराओं के बीच टकराव चल रहा है। पाश्चात्य संस्कृति और सभ्यता भारतीय समाज को बुरी तरह प्रभावित कर रही है। इसी के चलते समाज में
 
dr ashok kumar mishra
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हिंदी काव्य साहित्य में शकुन-अपशकुन का अनुशीलन

-डॉ. अशोक प्रियरंजनभारतीय समाज में प्रारंभिक काल से शकुन अपशकुन की बड़ी मान्यता रही है। व्यापक समाज शकुनापशकुन का विचार करके ही अपने कार्यों का निष्पादन करता है। डॉ. परमात्मा शरण वत्स ने अपनी पुुस्तक शकुन-अपशकुन में हिंदी साहित्य की विविध कृतियों में इस
 
dr ashok kumar mishra
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सूर्यग्रहण- पाखंडियों का महापर्व

वैसे सूर्यग्रहण तो पहले भी होते रहे हैं लेकिन आज का सूर्यग्रहण बहुत ही अनोखा है। पहली बार मीदिया ने इसे इतना बडा कवरेज दिया है कि लगता है बीते सप्ताह यह खबर हमारे देश मे पहले पायदान पर रही. तीन दिनों से सभी न्यूज चैनलों पर सिर्फ़ यही दिखाया जा रहा है.
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आधी दुनिया पर वैचारिक चिंतन

-डॉ. अशोक प्रियरंजनस्त्री विमर्श पर विविध आयामों और दृष्टिकोणों से चिंतन की कड़ी में सुधा सिंह ने भी आधी दुनिया के दुख, सुख, समस्याओं और त्रासद स्थितियों को सार्थक और प्रभावशाली रूप से अभिव्यक्त किया है। नारी चिंतन को उन्होंने व्यक्तिगत, राष्ट्रीय और
 
dr ashok kumar mishra
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जीवन की त्रासदी से रू-ब-रू कराती गजलें

-डॉ. अशोक प्रियरंजनमौजूदा दौर की सामाजिक, राजनीतिक विसंगतियों, आम आदमी की संवेदना, दलित जीवन की त्रासदी, मानवीयता के क्षरण से उपजी स्थितियों को डॉ. राम गोपाल भारतीय ने अपने गजल संग्रह 'हाशिए के लोगÓ में बड़े प्रभावशाली ढंग से अभिव्यक्त किया है। समाज के
 
dr ashok kumar mishra
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गाँधी और गांधीवाद

निशांत कौशिक नहीं ये बिल्कुल भी सही जगह नहीं है, जब मैं गाँधी जी के जन्म से लेकर, नाथूराम गोडसे तक की मुलाक़ात का सचित्र वर्णन कराऊं। २ अक्टूबर ही नहीं १९४७ के बाद हर पल हर दिन गाँधी जी का दिया हुआ है, सो थोड़ा सा याद करना आवश्यक है. चूँकि १९४७ की आज़ाद
 
रंगनाथ सिंह
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बैलगाड़ी रचना है, गाड़ीवान कवि, आलोचक कुत्ता , तो क्या पाठक बैल है ?

तीसरे आलोचक का वक्तव्य -      शरद कोकास-                                                      
 
शरद कोकास
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बेवकूफ बनाना बंद कीजिए

लिब्रहान आयोग एक ऐसा जिन्न है जो अंदर से फुसफुसा है। मैंने इस आयोग के लीक होने से लेकर संसद में प्रस्तुत होने तक हर खबर को गौर से पढ़ा। पढ़ा नहीं समझो समय बर्बाद किया। अब्रहाम आयोग ने करीब नौ करोड़ रुपए और सत्रह साल का समय लिया। उसकी रिपोर्ट पढ़कर मन में
 
रंगनाथ सिंह
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क्या राय है ?

एक नामी-गिरामी पत्रकारिता संस्थान की प्रवेश-परीक्षा में एक सवाल पूछा गया। प्रश्न कमोबेश कुछ यूँ था, क्या भ्रष्टाचार हमारे दैनिक जीवन में इतना आम हो चुका है कि अब यह कोई मुद्दा नहीं रहा ? छात्रों ने क्या-क्या उत्तर दिए यह जानने की मेरी तीव्र 
 
रंगनाथ सिंह
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क्रिकेट कल्चर

भारत में क्रिकेट एक खेल से आगे बढ़ कर एक कल्चर बन चुका है। इस क्रिकेट कल्चर ने हमारे देश को क्या दिया है या क्या-क्या छीना है इस पर संस्कृत मंत्रालय की फेलोशिप से एक सघन और विस्तृत अध्ययन किया जा सकता है। आज हम ज्ञान और तकनीक के हर क्षेत्र मंे पीछे है
 
रंगनाथ सिंह
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अपनी कविता किसे अच्छी नहीं लगती

ब्लॉग जगत में कविताओं के अनेक ब्लॉग हैं । यहाँ कविताओं के पाठक भी अनगिनत हैं ।सामान्यत: यह देखा गया है कि हर ब्लॉगर कहीं न कहीं कविता से जुड़ा है कहीं कवि के रूप में कहीं पाठक के रूप में । मैं भी मूल रूप से कवि हूँ और ब्लॉग जगत में प्रवेश से पूर्व ही
 
शरद कोकास
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जेपी और उनके आंदोलनों से जुड़े सभी को शत-शत नमन।

आज जयप्रकाश नारायण (जेपी) का जन्मदिन है। बहुधा उनको सम्पूर्ण क्रांति आदोलन के लिए याद किया जाता है। इस तरह सीमित परिप्रेक्ष्य में याद करना जेपी के संपूर्ण कृतित्व का अवमूल्यन ही है। भारत छोड़ो आंदोलन से ले कर सम्पू्र्ण क्रांति तक जेपी ने कई बड़े आंदोलन
 
रंगनाथ सिंह
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विष्णु खरे उर्फ आलोचना की तानाशाही

विमल कुमार भारतीय राजनीति में जिस तरह भाषा का स्खलन दिखता है उसी तरह अब हिन्दी आलोचना में भी यह स्खलन नजर आने लगा है। वह राग-द्वेष,अहमन्यता,उखाड़-पछाड़,गिरोहबंदी,साहित्यिक वोट बैंक बनाने की लालसा से भी संचालित होने लगी है। इसका ताजा उदाहरण प्रसिद्
 
रंगनाथ सिंह
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संतुलित आलोचना का सकारात्मक प्रभाव पड़ता है [ज्ञानपीठ से विभूषित कुँवर नारायण से बातचीत] - महावीर अग्रवाल

अपनी रचना प्रक्रिया पर प्रकाश डालते हुए बताइए, आपकी आलोचना के क्षेत्र में रुचि कैसे जागृत हुई ? आप कब से यह कार्य कर रहे हैं ? इस क्षेत्र को आपने क्यों चुना ? क्या, आपने दूसरी विधाओं में भी लिखा है ? कुंवर नारायण : पढ़ने का शौक शुरु से ही रहा, लिखना
 
साहित्य-शिल्पी