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कहीं इलाज ही आपको बीमार ना कर दे?

सावधानी प्रत्येक उपचार की माँ है परन्तु आज के आदमी की सबसे बड़ी तकलीफ - वो इतना व्यस्त है कि सावधान या होश में रहने में उसे बड़ी तकलीफ होती है। वो चाहता है कि सारे समाधान पके-पकाये उसकी जद में आ जायें। लेकिन यदि आप चाहते हैं कि आप स्वस्थ, सकुशल जिन्दा रहें
 
Rajey Sha
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देवेन्‍द्र प्रकाश मिश्र का आलेख : भारत की वननीति में बदलाव आवश्‍यक

आजादी के बाद बनी भारतीय वननीति की समीक्षा सन 1988 में की गई थी। लेकिन परिस्‍थितियों के अनुसार उसमें हेर-फेर किए बिना यथावत्‌ लागू कर दिया गया, जबकि वर्ष 1975 में नेपाल राष्ट्र द्वारा अपनाई गई वननीति का भारतीय वनों पर प्राकृतिक एवं मानवजनित कारणों का
 
Raviratlami
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सुभाष राय का आलेख : सामाजिक सरोकार समझें ब्लॉगर

“अभी हाल में एक ब्लाग अपने अश्लील आमंत्रण के लिए बहुत चर्चित हुआ था. वहां टिप्पणियों की बरसात हो रही थी. पर इस नाते उस गलीच लेखन को श्रेष्ठ नहीं ठहराया जा सकता. चर्चा में आने की व्याकुलता कोई रचनात्मक काम नहीं करने देगी. ऐसे ब्लॉगों के होने का कोई मतलब
 
Raviratlami
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जाति जनगणना का प्रश्‍न- दिलीप मंडल

हर दशक में एक बार होने वाली जनगणना के लेकर इस समय देश में भारी विवाद चल रहा है। विवाद के मूल में है जाति का प्रश्न। मंडल कमीशन की रिपोर्ट लागू होने के बाद से ही इस बात की मांग उठने लगी थी कि देश में जाति आधारित जनगणना करायी जाए, ताकि किसी समुदाय [...]
 
गंगा सहाय मीणा
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भोजपुरिया कहावतन में नाऊ

अगर रउरा भोजपुरिया समाज, रहन-सहन, खान-पान आदि से पूरा तरे परिचित भइल चाहतानी त बहुते मोटे-मोटे किताब आदि पढ़ले के जरूरत नइखे, जरूरत बा त भोजपुरिया कहावतन के समझे के। इ भोजपुरिया कहावत भोजपुरिया समाज के दरपन हईंसन जवने में रउआँ साफ-साफ भोजपुरिया समाज ओ
 
प्रभाकर पाण्डेय
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शिक्षा और आधुनिक प्यार ********* सन्तोष कुमार "प्यासा"

आज कल प्यार का भूत युवाओ पर अच्छा खासा चढ़ा हुआ है ! गर्लफ्रेंड और बॉयफ्रेंड बनाने का फैशन सर चढ़ कर बोल रहा है ! जिसे देखो वही इसमें बढ़ चढ़ कर हिस्सा ले रहा है ! प्यार का खुमार इतना ज्यादा चढ़ चूका है की युवा पीढ़ी ने पढाई को साइड में रख दिया है !प्यार
 
संतोष कुमार "प्यासा"
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आजु पहिली तारीख हS

रातिभर दुनु परानी सुति ना पउवींजा। करवट बदलत अउर एन्ने-ओन्ने के बाति करत कब बिहान हो गउए पते ना चलुवे। सबेरे उठते मलिकाइन चाय बना के ले उअवी अउर कहुवी की जल्दी से तइयार होके आफिस चलि जाईं। हम कहुँवी की अरे आफिस त 9 बजे खुली, अबे साते बजे आफिस जाके का
 
प्रभाकर पाण्डेय
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मानसून का advertisement

मुंबई में मानसून का प्रचार अभियान (हल्की फुल्की फुहारें) शुरू हो गया है, वैसे ये बताता चलूँ कि 'मानसून' से मतलब मानसून से ही है ये कोई मीरा नायर की फिल्म नहीं है, ....................ये वो है जिसके बारे में मौसम विभाग कभी सही नहीं बता पाया इसलिए इस बार
 
अंकित "सफ़र"
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यशवन्त कोठारी का आलेख : आदिवासी असंतोष : कारण-निवारण

आदिवासी-चार अक्षरों का एक छोटा सा नाम, लेकिन सामाजिक व्यवहार के रूप में अनेक समुदाय, जातियां और किस्मों में बंटा संसार और इस संसार की अपनी समस्याएं, अपना राजवेश, अपने रीति-रिवाज। सामान्यतः शांत और सरल, लेकिन विद्रोह का नगाड़ा बजते ही पूरा समूह सम्पूर्ण
 
Raviratlami
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क्यूकी बाप भी कभी बेटा था ......संतोष कुमार "प्यासा"

एक जमाना था जब लड़के अपने घर के बड़े बुजुर्गों का कहना सम्मान करते थे उनका कहा मानते थे ! कोई अपने पिता से आंख मिलाकर बात भी नहीं करता था ! उस समय कोई अपने पिता के सामने कुर्सी या पलंग पर भी नहीं बैठता था ! तब प्यार जैसी बात को अपने बड़े बुजुर्गों से
 
संतोष कुमार "प्यासा"
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यशवंत कोठारी का आलेख : बच्चों की छुट्टियों का सदुपयोग करें

शीध्र ही बच्चों की गर्मी की छुट्टियां शुरू होने वाली हैं। इन लम्बी छुट्टियों में मध्यम वर्गीय परिवार के लोग न तो लम्बे समय के लिए पर्यटन पर जा सकते हैं, और न ही रिश्तेदारों के यहां लम्बी छुट्टियां व्यतीत कर सकते हैं। ऐसे में बच्चे इधर उधर फिरते रहते हैं,
 
Raviratlami
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यशवंत कोठारी का आलेख : कैसा हो बच्चों का साहित्य

पिछले कुछ वर्षों में हिन्दी व भारतीय भाषाओं में प्रचुर मात्रा में बाल साहित्य का प्रकाशन हुआ है। अंग्रेजी के साहित्य से तुलना करने पर हिन्दी व भारतीय भाषाओं का साहित्य अभी भी काफी पीछे है। मगर संख्यात्यमक दृष्टि से काफी साहित्य छपकर आया है। सरकारी थोक
 
Raviratlami
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रवींद्र नाथ टैगोर 150 वीं जयंती वर्ष पर यशवंत कोठारी की विशेष प्रस्तुति

मैं अपने परिवेश के प्रति बहुत ही सतर्क रहता हूं ! -रवीन्द्रनाथ टेगौर - - तथा श्रीमती सत्यवती देवी ने रवींद्रनाथ ठाकुर से उनकी रचना प्रक्रिया पर बातचीत की थी, जो ‘फारवर्ड’ पत्रिका में 23 फरवरी, 1936 के अंक में छपी थी, प्रस्तुत है वह सदाबहार बातचीत।
 
Raviratlami
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रचनाकार के नित्य के नियमित पाठकों की संख्या प्रतिदिन 2000 से ऊपर पहुँची

हिन्दी साहित्य को समर्पित ब्लॉग के लिए यह आंकड़ा मायने रखता है. जहाँ हिन्दी की किताबें अधिकतम 250 – 500 की संख्या में छप रही हों, हिन्दी पाठकों की कमी का रोना चहुँ ओर हो रहा हो, वहां रचनाकार के नियमित पाठकों की संख्या प्रतिदिन 2000 से ऊपर पहुँच गई है.
 
Raviratlami
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अंग्रेज तो हिन्दुस्तान को आज़ाद छोड़ कर चले गए, लेकिन अपने पीछे हिंदी भाषा को अंग्रेजी का गुलाम बना कर गए!

पुन:  स्वागत है आपका -परिकल्पना पर !ब्रेक पर जाने से पहले आप मुखातिव थे भारतीय नागरिक, अमित केशरी, प्रताप सहगल और सरस्वती जी से ......आईये अब हम-अमित केशरी  के राष्ट्रभाषा से संवंधित आलेख पर दृष्टि डालते हैं
 
रवीन्द्र प्रभात
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मेरा भारत महान

मेरा भारत महानमेरा महान देश भारत विश्व के अग्रणी देशों में से एक है । अनेकता में एकता की मिसाल मेरा देश कश्मीर से लेकर कन्या कुमारी तक विभिन्न सन्सकृतिओं को अपने आप में समेटे हुए है । २९ प्रदेशो एवं ४ केंद्र शाशित क्षेत्रों से बना ये देश अखंड भारत के नाम
 
AKHRAN DA VANZARA
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जाना एक सच्चे हिंदी पत्रकार का

हैदराबाद से प्रकाशित हिंदी की प्रतिष्ठित साहित्यिक पत्रिका ''कल्पना'' के सम्पादक मंडल में रहे यशस्वी पत्रकार मुनींद्रजी [जन्म १९२५ ई] का गत दिनों - १६ मई २०१० ई. को - निधन हो गया. ''कल्पना'' के बंद होने के बाद से उन्होंने ''दक्षिण समाचार'' [पूर्वनाम
 
ऋषभ Rishabha
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बंशीधर मिश्र का आलेख : ज्ञान पर पाखंड भारी

भाषा भी क्या चीज है। आदमी को जानवर से इन्सान बना देती है। जब मनुष्य को बोलना नहीं आता था तो वह संकेतों से संवाद कर लेता था। उसके आंसू बता देते थे, वह दुखी है। ठहाके उसकी ख़ुशी बयाँ करते थे। लाल आँखें और फड़कते होठ उसका गुस्सा जाहिर करते थे। वह अन्दर जो
 
Raviratlami
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सुभाष राय का आलेख : वक्त की आवाज हैं शब्द

साहित्य-चिंतन --------------- वक्त की आवाज हैं शब्द डा. सुभाष राय  अगर आप किसी पत्रकार, लेखक या  साहित्यकार से पूछें कि वह  आखिर  लिखता  क्यों हैं? उसे लिखने का  रोग है या मजबूरी या किसी खास किस्म की जरूरत या कुछ और? इससे
 
Raviratlami
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बुन्देली लोकसंस्कृति और बुन्देली लोकभाषा का संरक्षण अपरिहार्य

बुन्देली लोकसंस्कृति और बुन्देली लोकभाषा का संरक्षण अपरिहार्य किसी भी क्षेत्र के विकास में उस क्षेत्र संस्कृति की अहम् भूमिका रहती है। संस्कृति, भाषा, बोली आदि के साथ-साथ उस क्षेत्र की ऐतिहासिक विरासत, लोकसाहित्य, लोककथाओं, लोकगाथाओं, लोकविश्वासों,
 
डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
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संजीव तिवारी का आलेख :लोकगीतों में छत्तीसगढ़ की पारंपरिक नारी

संजीव तिवारी का जन्म  02 जनवरी 1968 को हुआ . इन्होने  एम.काम., एल एल.बी. किया है , इन्हें  अंग्रेजी, हिन्‍दी तथा  छत्‍तीसगढी भाषा का ज्ञान है .इनका  छत्‍तीसगढी व हिन्‍दी में समान रूप से लेखन, 1993 से जारी है. स्‍थानीय समाचार
 
रवीन्द्र प्रभात
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यशवन्त कोठारी आलेख : ग्रामीण विकास में हिन्दी व भारतीय भाषाओं का योगदान

भारत गांवों में बसता है। और ग्रामों का विकास भारत का विकास है। गांवों के विकास के लिए केन्द्र व राज्य सरकारें समय समय कई योजनाएँ चलाती है तथा ये योजनाएँ ग्रामीणों तक पहुँचाने के प्रयास करती है। देश में योजनाएँ तो अंग्रेजी में बनती है मगर इन्हें ग्रामीणों
 
Raviratlami
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दीप्ति परमार का आलेखः समकालीन हिन्दी उपन्यासः नारी विमर्श

पिछली सदी का अंतिम दशक और प्रारंभिक सदी का प्रथम दशक लगभग दलित और स्त्री विमर्श के दशक रहे हैं । इन दशकों में महिला लेखन एक नयी पहचान लेकर आया । समग्र साहित्य जगत ने एक स्वर से यह स्वीकार किया है कि हिन्दी साहित्य साहित्य में नारी जीवन सम्बन्धित साहित्य
 
Raviratlami
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डा.सुभाष राय का आलेख : जाति न पूछो साध की

डा.सुभाष राय हिंदी ब्लोगिंग के समर्पित व सक्रिय विद्यार्थियों में से एक हैं...इनके अनुसार ये साहित्य और दर्शन का विद्यार्थी हैं । निरंतर सीखते जाना और जीवन को समझना ही इनका लक्ष्य है। यह  हम सभी के लिए वेहद सुखद विषय है कि वे ब्लोगिंग के
 
रवीन्द्र प्रभात
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प्रमोद भार्गव का आलेख : जायसी के राजनीतिक दोहन की जरूरत

प्रेम मार्गी सूफी धारा के कवि मलिक मोहम्मद जायसी को कुछ अर्से से ओछी राजनीति के चलते मुस्लिम मतदाताओं को लुभाने की नीयत से राजनीतिक बिसात का मोहरा बनाने की निम्र स्तरीय कोशिश की जा रही है। किसी भी देवपुरुष को महापुरुष को और संस्कृति पुरुष को विशेष समुदाय
 
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प्रमोद भार्गव का आलेख : स्त्री के जैविक अधिकार और तकनीक का हस्तक्षेप

स्त्री-पुरुष संबंध जैविक होने के साथ विपरीत लिंगी होने के कारण सहज व प्राकृतिक हैं। सुदृढ़ पारिवारिक व सामाजिक व्यवस्था को बनाए रखने के लिए उन्हें जन्म-जन्मांतर के अंध विश्वास से जोड़ा गया। लेकिन कालांतर में स्त्री के शिक्षित, आर्थिक रूप से स्वावलंबी और
 
Raviratlami
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हिंदी के अनुकूल होती जा रही है आईटी की दुनिया : बालेन्दु शर्मा दाधीच

 आज के कोई सात साल पहले भारतीय भाषाओं का एक महापोर्टल शुरू हुआ था, नाम था- नेटजाल.कॉम। वह हिंदी और अंग्रेजी सहित नौ भा षाओं में बनाया गया था और खबरों व लेखों के अलावा ईमेल जैसी सुविधाएं भी प्रदान करता था। लेकिन अपनी स्थापना के एक-डेढ़ साल के भीतर ही
 
रवीन्द्र प्रभात
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नन्दलाल भारती का आलेख : भारतीय महिलाओं में पुस्‍तक पढ़ने की आदत को बढ़ावा

नन्‍दलाल भारती एम.ए.। समाजशास्‍त्र। एल.एल.बी.। आनर्स। पोस्‍ट ग्रेजुएट डिप्‍लोमा इन ह्‌यूमन रिर्सोस डेवलपमेण्‍ट लेखक स्‍थायी पता- आजाद दीप, 15-एम-वीणानगर इंदौर।म.प्र.!-452010दूरभाष-0731-4057553 चलितवार्ता-9753081066 भारतीय महिलाओं में पुस्‍तक पढ़ने की आदत
 
Raviratlami
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मुंह में गाँधी और बगल में देश की बर्बादी

मेरे देश,मोहनदास करमचंद गाँधी मेरा नाम है. कभी सत्य और अहिंसा का पर्याय मैं, अब सिर्फ असत्य और हिंसक लोगों की जुबान पर रहता हूँ, या फिर पार्क, चौराहे, मैदानों में बस प्रस्तर मूर्ति बनकर रहता हूँ----जिस पर सिर्फ गन्दगी-ही-गन्दगी रहती है ! आज के युवा
 
रवीन्द्र प्रभात
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रूपसिंह चन्देल का आलेख ’आजादी की तीसरी लड़ाई’.

 क्रान्तिदिवस (10 मई ) के अवसर पर प्रस्तुत है श्री रूपसिंह चंदेल का आलेख ’आजादी की तीसरी लड़ाई’.!!आजादी की तीसरी लड़ाई !!रूपसिंह चन्देल10 मई ,1857 को ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ एक क्रांतिकारी जंग प्रारंभ हुई, जिसकी लपटों में लाखों भारतीयों ने अपनी
 
रवीन्द्र प्रभात
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बालकदास का आलेख – प्याऊ का शास्त्रीय महत्व

प्‍याऊ का शास्‍त्रीय महत्‍व ग्रीष्‍मे चैव बसंते च पानीये यः प्रयच्‍छति भविष्‍योत्तर पुराण के इस वचन के अनुसार ग्रीष्‍म ऋतु में और बसंत ऋतु में जो पानी पिलाने की व्‍यवस्‍था करता है, उसके पुण्‍य का हजारों किताबें भी वर्णन नहीं कर सकती हैं। गर्मी बढ़ने के
 
Raviratlami
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यशवन्त कोठारी का आलेख : पाठकों की तलाश में

हर लेखक को पाठकों की तलाश रहती है। उसे पाठकों की तलाश में भटकना पड़ता है। कवियों-शायरों को श्रोताओं की तलाश में जमीन-आसमान एक करना पड़ता है। चैनलों- दूरदर्शनीय कार्यक्रमों को दर्शकों का अभाव सताता रहता है, इधर टीआरपी घटी उधर कार्यक्रम बन्द, इधर पाठक गायब
 
Raviratlami
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कविता में छंदानुशासन.......(आलेख)......Acharyaसंजीव 'सलिल'

शब्द ब्रम्ह में अक्षर, अनादि, अनंत, असीम और अद्भुत सामर्थ्य होती है. रचनाकार शब्द ब्रम्ह के प्रागट्य का माध्यम मात्र होता है. इसीलिए सनातन प्राच्य परंपरा में प्रतिलिपि के अधिकार (कोपी राइट) की अवधारणा ही नहीं है. श्रुति-स्मृति, वेदादि के रचयिता मन्त्र
 
हिन्दी साहित्य मंच
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यशवन्त कोठारी का आलेख – मेरे पोस्टमैन

आज मैं पोस्टमैनों की चर्चा करना चाहता हूं। कारण स्पष्ट है कि बिना पोस्टमैन के लेखक का जीवन अधूरा है। सच पूछा जाये तो पोस्टमैन ही लेखक का सच्चा मित्र होता है। लेख सम्पादक तक पहुंचाने तथा चैक या धनादेश को लेखक तक पहुंचाने में सबसे महत्वपूर्ण कड़ी पोस्टमैन
 
Raviratlami
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सुरेन्द्र अग्निहोत्री का आलेख – आजादी का तमाशा कब तक?

वास्‍तव में हम स्‍वतन्‍त्रता का सुख अनुभव कर रहे हैं? नहीं, तो क्‍यों? क्‍या इसी आजादी के लिए अपना सब कुछ अर्पण कर दिया था। तमसो मा ज्‍योतिर्गमय का उद्‌घोष करने वाले देश में कालिमा के बादल कैसे छटेंगे। लोकतंत्र के चारों पाये एक दूसरे से अधिक शक्‍तिशाली
 
Raviratlami
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डॉ0 कुमारेन्द्र सिंह सेंगर का आलेख : समाज संचालन में सामाजिक सरोकारों की भूमिका

संक्षिप्त परिचयनाम - डा0 कुमारेन्द्र सिंह सेंगर/ जन्मतिथि - 19-03-1974 (वास्तविक 19.09.1973) / जन्म स्थान - उरई (जालौन) उ0प्र0 / शिक्षा - पी-एच0 डी0 (हिन्दी साहित्य)/  (डा0 वृन्दावनलाल वर्मा के उपन्यासों में अभिव्यक्त सौन्दर्य का अनुशीलन) / एम0 ए0
 
रवीन्द्र प्रभात
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जिन्होंने सशस्त्र क्रान्ति द्वारा अंग्रेजों को भारत से बाहर निकालकर स्वराज्य प्राप्ति का सपना देखा, वे कौन थे ?

"...........१८५७ की क्रान्ति भारतीय इतिहास की एक युग परिवर्तनकारी घटना थी। इस क्रान्ति ने लोगों में गुलामी की जंजीरें  तोड़ने का साहस पैदा किया। यद्यपि अंग्रेजी हुकूमत ने इस क्रान्ति से निकली ज्वाला पर काबू पा लिया और शासकीय ढाँचे में आधारभूत
 
रवीन्द्र प्रभात
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जंग-ए-आजादी में क्रांतिकारियों की भूमिका : अमित कुमार

जीवन-वृत्त /नाम : अमित कुमार यादव /जन्म : २४ सितम्बर १९८६, तहबरपुर, आजमगढ़ (उ० प्र०)/शिक्षा : इलाहाबाद वि”वविद्यालय से स्नातक एवं तत्प”चात इंदिरा गांधी नेशनल ओपेन यूनिवर्सिटी से एम०ए० (लोक प्रकाशन),विधा : मुख्य रूप से लेख /प्रकाशन : विभिन्न
 
रवीन्द्र प्रभात
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साहित्य को पुरस्कृत करना मानवीय संवेदनाओं और अनुभूतियों की पहचान को दर्शाता है।

"पुरस्कारों की समाज में प्राचीनकाल से ही एक लम्बी परम्परा रही है। उत्कृष्ट व सृजनात्मक कार्य को सम्मानित-पुरस्कृत करके जहाँ सम्बन्धित व्यक्ति को प्रोत्साहित किया जाता है, वहीं अन्य लोगों हेतु यह एक नजीर भी पेश करता है। पुरस्कार भावनात्मक, आर्थिक या अन्य
 
रवीन्द्र प्रभात
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श्री राम शिव मूर्ति यादव का आलेख :साहित्य में पुरस्कारों की राजनीति

श्री राम शिव मूर्ति यादव उत्तर प्रदेश के जौनपुर जनपद के मूल निवासी हैं,  1962 में तिलकधारी महाविद्यालय, जौनपुर से स्नातक एवं तत्पश्चात काशी विद्यापीठ से 1964 में समाज शास्त्र विषय से स्नाकोत्तर. नौकरीपेशा के रूप में स्वास्थ्य विभाग, उत्तर
 
रवीन्द्र प्रभात
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