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अन्वेषण

अन्वेषणआज की इस दौड़ मेंसब कुछ नया करने की होड़ में,कितना कुछ बदल गया है.असमंजस में पड़ गयी मैं, जब सुना,इतने बरसों बाद भी,नयापन नहीं है प्रेम संवाद में,डूब गया मन,तत्क्षण ही  तम के ताल में. ऊपर आने, उबराने के,तलाशने लगा विकल्प.एक
 
रचना दीक्षित