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कब तक केवल मुसलमान पकड़े जाते रहेंगे?

जिन्‍हें माओवाद का मतलब समझ में नहीं आता… [16 June 2010 | Read Comments | ] आनंद स्‍वरूप वर्मा ♦ काठमांडो से प्रकाशित अंग्रेजी साप्ताहिक ‘दि टेलीग्राफ’ ने नेपाल के कुछ बुद्धिजीवियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और राजनीतिक विश्लेषकों से जानना चाहा था
 
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पुरस्‍कार प्रकरण: गगन गिल के पक्ष में तेजी ग्रोवर का पत्र

साजिद रशीद और चिदंबरम की जबान एक क्‍यों है? [15 June 2010 | Read Comments | ] विश्‍वदीपक ♦ रशीद ने माओवादियों के प्रतिरोध को ‘सामूहिक दमन’ की कार्रवाई बताया है। लगता है वो ‘वैदिकी हिंसा हिंसा न भवति’ में भरोसा रखते हैं। वरना कोई कारण नहीं कि वो
 
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साहित्‍यकार मीडिया में गुमनाम क्‍यों हैं?

रूमान से भरी अरुंधती मूर्खों जैसे सपने देख रही है [14 June 2010 | Read Comments | ] साजिद रशीद ♦ अरुंधती ने ‘आउटलुक’ के अपने लेख में नक्सलवादियों की हिंसा को दुरुस्त ठहराने के लिए जो रोशनाई खर्च की थी, उसमें अब ज्ञानेश्वरी एक्सप्रेस के उन डेढ़
 
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“अहा जिंदगी” की कमान आलोक श्रीवास्‍तव के हाथों में

रूमान से भरी अरुंधती मूर्खों जैसे सपने देख रही है [14 June 2010 | Read Comments | ] साजिद रशीद ♦ अरुंधती ने ‘आउटलुक’ के अपने लेख में नक्सलवादियों की हिंसा को दुरुस्त ठहराने के लिए जो रोशनाई खर्च की थी, उसमें अब ज्ञानेश्वरी एक्सप्रेस के उन डेढ़
 
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अब “अहा जिंदगी” की कमान आलोक श्रीवास्‍तव के हाथों में

भोपाल मर रहा था, अर्जुन सिंह जहाज में उड़ रहे थे [11 June 2010 | Read Comments | ] आनंद स्‍वरूप वर्मा ♦ स्पष्ट चेतावनी के बावजूद अर्जुन सिंह को हिरासत में क्यों नहीं लिया गया? इतना ही नहीं, 6 दिसंबर को जिस समय समूचा भोपाल मौत की दहशत में डूबा
 
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अब “अहा जिंदगी” की कमान आलोक श्रीवास्‍तव के हाथों में

भोपाल मर रहा था, अर्जुन सिंह जहाज में उड़ रहे थे [11 June 2010 | Read Comments | ] आनंद स्‍वरूप वर्मा ♦ स्पष्ट चेतावनी के बावजूद अर्जुन सिंह को हिरासत में क्यों नहीं लिया गया? इतना ही नहीं, 6 दिसंबर को जिस समय समूचा भोपाल मौत की दहशत में डूबा
 
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राजकिशोर भी सनसनी फैलाने का कोई मौका नहीं छोड़ते

भोपाल मर रहा था, अर्जुन सिंह जहाज में उड़ रहे थे [11 June 2010 | Read Comments | ] आनंद स्‍वरूप वर्मा ♦ स्पष्ट चेतावनी के बावजूद अर्जुन सिंह को हिरासत में क्यों नहीं लिया गया? इतना ही नहीं, 6 दिसंबर को जिस समय समूचा भोपाल मौत की दहशत में डूबा
 
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दैनिक भास्‍कर ने सर्वेक्षण में चालाकी से सवाल पूछे थे

तीस लाख का ठेका [10 June 2010 | Read Comments | ] डेस्‍क ♦ अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विवि के कुलपति वीएन राय ने सीएसडीएस के सीनियर फेलो, पत्रकार अभय कु दुबे को तीस लाख रुपये का एक ठेका दिया है। Read the full story »न्‍याय का बूचड़खाना [10 June 2010
 
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पहले दैनिक भास्‍कर बताये कि उसकी जाति क्‍या है?

मिटाने-जोड़ने का खेल [9 June 2010 | Read Comments | ] सुदीप्ति ♦ साहित्‍य, राजनीति, विज्ञान, कला आदि के इतिहास में छूट गये लोगों को क्‍या दर्ज कर लिये गये लोगों की कीमत पर ही जगह मिलेगी? Read the full story »जाति गिनना जरूरी [9 June 2010 |
 
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जिला अदालत, भोपाल 2010, 12 बजकर 5 मिनट!

मिटाने-जोड़ने का खेल [8 June 2010 | Read Comments | ] सुदीप्ति ♦ साहित्‍य, राजनीति, विज्ञान, कला आदि के इतिहास में छूट गये लोगों को क्‍या दर्ज कर लिये गये लोगों की कीमत पर ही जगह मिलेगी? Read the full story »जाति गिनना जरूरी [8 June 2010 |
 
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नजर पर पर्दा या जिस्‍म पर पर्दा… देखिए स्‍पेशल रिपोर्ट!

वीसी का तुगलकी फैसला [5 June 2010 | Read Comments | ] पूर्व छात्र ♦ माखनलाल विश्‍व-विद्यालय में पत्रकार बनने के इच्छुक अभ्यर्थी अब अपनी भाषा, सरोकार और समझ की जगह अपने अंक-पत्र के आधार पर प्रवेश पाएंगे। Read the full story »न्‍याय के हत्‍यारे
 
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तुम्‍हारी भाषा गंदी हो गयी है, उसमें विचार आ गये हैं

स्टिंग में फंसे... [4 June 2010 | Read Comments | ] डेस्‍क ♦ प्रयाग महिला विद्यापीठ में एमए हिंदी की मौखिक परीक्षा के दौरान परीक्षार्थियों से पांच-पांच सौ रुपये घूस लेते हुए एक अध्‍यापिका कैमरे में कैद हो गयी है। Read the full story »दलित की
 
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मीरा कुमार ने कहा कुछ, एनडीटीवी ने दिखाया कुछ!

साहित्‍यकारों का स्‍तर [2 June 2010 | Read Comments | ] अंशुमाली रस्‍तोगी ♦ हमें पता चल रहा है कि हमारी हिंदी के साहित्यकार हैं कैसे? उनके कथित लेखन और व्यवाहरिकता में कितना और कहां-कहां अंतर है। Read the full story »मणिपुर का माखौल [2 June
 
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पत्रकार संगठन ने किया घूस का स्टिंग ऑपरेशन

साहित्‍यकारों का स्‍तर [2 June 2010 | Read Comments | ] अंशुमाली रस्‍तोगी ♦ हमें पता चल रहा है कि हमारी हिंदी के साहित्यकार हैं कैसे? उनके कथित लेखन और व्यवाहरिकता में कितना और कहां-कहां अंतर है। Read the full story »मणिपुर का माखौल [2 June
 
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कोई बताएगा, ग्‍लैडसन डुंगडुंग को गुस्‍सा क्‍यों आता है?

मंसूर भाई का जलवा [30 May 2010 | Read Comments | ] शेष नारायण सिंह ♦ भाई मंसूर नहीं रहे। पाकिस्तान के शहर कराची में मंसूर सईद का इंतकाल हो गया। मौलाना अहमद सईद का एक पोता और चला गया। Read the full story »मीडिया का झूठ [31 May 2010 | Read
 
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आदिवासियों के प्रति मूक-बधिर राष्‍ट्रपति के नाम चिट्ठी

मंसूर भाई का जलवा [30 May 2010 | Read Comments | ] शेष नारायण सिंह ♦ भाई मंसूर नहीं रहे। पाकिस्तान के शहर कराची में मंसूर सईद का इंतकाल हो गया। मौलाना अहमद सईद का एक पोता और चला गया। Read the full story »कौन जात हो? [30 May 2010 | Read
 
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एक लेखक के अपमान का विरोध या गैंगवार, साफ करें

झूठा सच के छिलके [29 May 2010 | Read Comments | ] रीतेश ♦ कोडरमा के इस पाठक परिवार ने इतने झूठ बोले हैं कि उसकी गिनती नहीं है। झूठ बोलने के कारण पाठक जी का परिवार खुद ही नंगा हो रहा है। Read the full story »क्‍यों डरें इससे? [29 May 2010 |
 
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अपना जनरल नॉलेज दुरुस्‍त कीजिए वेद प्रताप वैदिक…

कहां है निरू का सिम? [28 May 2010 | Read Comments | ] रीतेश ♦ पुलिस ने अब तक निरुपमा पाठक के मोबाइल फोन का सिमकार्ड बरामद नहीं किया है, जिससे प्रियभांशु रंजन से उसकी बातचीत हो रही थी। Read the full story »क्‍यों डरें इससे? [29 May 2010 |
 
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बेवकूफ न बनाएं माननीय बाबूलाल मरांडी!

खाप पर खीस क्‍यों? [27 May 2010 | Read Comments | ] पंकज झा ♦ अगर नक्सलियों तक से बातचीत के बारे में केंद्र सोच सकता है, तो मध्य मार्ग अपना कर खाप पंचायतों की बात क्‍यूं नहीं सुनी जानी चाहिए? Read the full story »पूछताछ या ब्रह्मज्ञान? [27 May
 
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श्‍यामानंद जालान : वे नींव की ईंट की तरह बने रहेंगे

हंस से भी छुट्टी [26 May 2010 | Read Comments | ] डेस्‍क ♦ विवादास्‍पद सांस्‍कृतिक पत्रकार अजित राय हंस की गली से भी निकाल बाहर किये गये हैं। वे हंस के सांस्‍कृतिक प्रतिनिधि थे। ताजा अंक में उनका नाम नहीं है। Read the full story »पूछताछ या
 
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कॉपीराइट कानून में संशोधन की तैयारी, सिब्‍बल को पत्र

निरुपमा हत्‍याकांड : झूठ और सच की परतें [24 May 2010 | Read Comments | ] रीतेश ♦ पुलिस ने फौरन निरुपमा पाठक के शव को अपने कब्जे में नहीं लिया। ऐसा क्यों नहीं किया गया, ये समझ से परे है। शव को उसके घर में ही छोड़ दिया गया ताकि निरुपमा पाठक के
 
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रामबिलास शर्मा… वह एक मशाल-सा कोई…

निरुपमा के जाने के बहुत बाद, जब गुबार थम जाए [22 May 2010 | Read Comments | ] दिलीप मंडल ♦ आने वाले दिनों में और कई निरुपमाओं की जान बचानी है तो उस वर्ण व्यवस्था की जड़ों को काटने की जरूरत है, जिसकी अंतर्वस्तु में ही हिंसा है। निरुपमा की हत्या
 
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जनगणना में जातियों की गिनती के पक्ष में हम क्यों हैं?

निरुपमा के जाने के बहुत बाद, जब गुबार थम जाए [22 May 2010 | Read Comments | ] दिलीप मंडल ♦ आने वाले दिनों में और कई निरुपमाओं की जान बचानी है तो उस वर्ण व्यवस्था की जड़ों को काटने की जरूरत है, जिसकी अंतर्वस्तु में ही हिंसा है। निरुपमा की हत्या
 
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जनगणना में जातियों की गिनती के पक्ष में हम क्यों हैं?

इस दुनिया में [20 May 2010 | Read Comments | ] विश्‍वदीपक ♦ साहित्य के नाम पर जो कूड़ा करकट पेश किया जा रहा, इसीलिए नहीं पढ़ा जा रहा है और इसीलिए मीडिया में उसे जगह भी नहीं मिल रही है। Read the full story »माओवादियों का लोकतंत्र [20 May 2010
 
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कोडरमा के “खाप” में सारे सनातनी एक साथ

इस दुनिया में [20 May 2010 | Read Comments | ] विश्‍वदीपक ♦ साहित्य के नाम पर जो कूड़ा करकट पेश किया जा रहा, इसीलिए नहीं पढ़ा जा रहा है और इसीलिए मीडिया में उसे जगह भी नहीं मिल रही है। Read the full story »माओवादियों का लोकतंत्र [20 May 2010
 
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रंग प्रसंग ने अजित राय का खेल बिगाड़ा, जनसत्ता से गये

इस दुनिया में आविष्‍कार के लिए कोई जगह नहीं! [19 May 2010 | Read Comments | ] विश्‍वदीपक ♦ साहित्य के नाम पर जो कूड़ा करकट पेश किया जा रहा, वो पढ़ने लायक नहीं है इसीलिए नहीं पढ़ा जा रहा है। और इसीलिए मीडिया में उसे जगह भी नहीं मिल रही है।
 
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लेखक बेहतर राष्‍ट्रीय प्रवक्‍ता हो सकते हैं, पर वे सुस्‍त हैं

ये तो पहली झांकी है, "मथुरा-काशी" बाकी है [18 May 2010 | Read Comments | ] पशुपति शर्मा ♦ चिदंबरमजी, आपकी नीयत को लेकर सवाल उठाने का मेरा इरादा कतई नहीं है। हो सकता है आप देश में अमनबहाली का सपना देख रहे हों पर साथ ही आप ये भी तय कर लीजिए कि ये
 
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साहित्‍य और मीडिया पर सेमिनार आज, हैबिटैट आएं

वीकेंड प्रोटेस्‍ट प्रोग्राम! [17 May 2010 | Read Comments | ] विजय प्रताप ♦ जामिया मिल्लिया इस्‍लामिया व नोएडा से आये हमारे साथियों को भी ऐसे कार्यक्रम की उम्मीद नहीं थी। उनकी भाषा में कहें तो ‘पैसा डांढ गया।’ Read the full story »राजपथ पर
 
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वर्धा के बाद इंद्रप्रस्‍थ विवि में भी गुंडई पर उतरे कुलपति

दो कवि, एक शाम [14 May 2010 | Read Comments | ] मिथिलेश श्रीवास्‍तव ♦ उस दिन हमने उस घटना को याद किया, जब दूरदर्शन पर आलोकधन्‍वा को बोलना सुनते हुए उनसे अगला प्रश्‍न करना मैं भूल गया। Read the full story »ये जातीय हत्‍याएं हैं [15 May 2010
 
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मतंग ने छह की बलि मांगी, 35 ने सिर आगे किया

आलोकधन्‍वा का साथ [14 May 2010 | Read Comments | ] मिथिलेश श्रीवास्‍तव ♦ उस दिन हमने उस घटना को याद किया, जब दूरदर्शन पर आलोकधन्‍वा को बोलना सुनते हुए उनसे अगला प्रश्‍न करना मैं भूल गया। Read the full story »एस वन से चिट्ठी [14 May 2010 |
 
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खबर का असर : रंग प्रसंग के चार संपादक बने

आलोकधन्‍वा का साथ [14 May 2010 | Read Comments | ] मिथिलेश श्रीवास्‍तव ♦ उस दिन हमने उस घटना को याद किया, जब दूरदर्शन पर आलोकधन्‍वा को बोलना सुनते हुए उनसे अगला प्रश्‍न करना मैं भूल गया। Read the full story »एस वन से चिट्ठी [14 May 2010 |
 
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कुत्ताकथा और भाषाई जातिवाद: क्‍या रवीश जातिवादी हैं?

खिसियानी बिल्‍ली... [13 May 2010 | Read Comments | ] राजकिशोर ♦ अपनी आलोचना से मैं विचलित नहीं होता। ऐसे मामलों में परंपरागत बुद्धिमत्ता यही है कि कुत्ते भूंकते रहते हैं और हाथी चलता जाता है। Read the full story »झारखंड भवन पर प्रदर्शन [13 May
 
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मुझे कुछ नहीं होगा… आइ लव यू रज्‍जन जी…

नीतीश की चापलूसी [12 May 2010 | Read Comments | ] प्रभात खबर ♦ मौर्य साम्राज्‍य के संस्थापक सम्राट चंद्रगुप्‍त रात में वेश बदल कर जनता के बीच जाते थे। जनता की पीड़ा जानने। कुछ वैसा ही नीतीश कर रहे हैं। Read the full story »पूछताछ का ड्रामा [12
 
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निरुपमा पाठक का ख़त, मां सुधा पाठक के नाम…

कठघरे में बरखा दत्त [10 May 2010 | Read Comments | ] आवेश तिवारी ♦ बरखा ने स्पेक्ट्रम घोटाले में अगर नीरा राडिया की मदद की, तो उसके पीछे सिर्फ उनका फायदा नहीं था, पूरे चैनल का हित उससे जुड़ा हुआ था। Read the full story »कुछ तो लोग कहेंगे [10
 
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प्रियभांशु रंजन पर मीडिया ट्रायल : ये ड्रामा कब थमेगा?

जाति से डर क्‍यों? [08 May 2010 | Read Comments | ] नवीन ♦ मैं विनोद जी से पूछना चाहता हूं कि देश में जितने अंतरजातीय विवाह सन 90 से लेकर आज तक हुए हैं, क्या उनकी संख्या 1950 से 90 तक से कम है? Read the full story »अनैतिक और अपराध [08 May 2010
 
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निरुपमा को न्‍याय के लिए रौशन हुई संघर्ष की हजारों लौ

जाति से डर क्‍यों? [08 May 2010 | Read Comments | ] नवीन ♦ मैं विनोद जी से पूछना चाहता हूं कि देश में जितने अंतरजातीय विवाह सन 90 से लेकर आज तक हुए हैं, क्या उनकी संख्या 1950 से 90 तक से कम है? Read the full story »अनैतिक और अपराध [08 May 2010
 
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सहारा से गये, लेकिन फायदे में रहे संजीव श्रीवास्‍तव

जाति से डर क्‍यों? [08 May 2010 | Read Comments | ] नवीन ♦ मैं विनोद जी से पूछना चाहता हूं कि देश में जितने अंतरजातीय विवाह सन 90 से लेकर आज तक हुए हैं, क्या उनकी संख्या 1950 से 90 तक से कम है? Read the full story »अनैतिक और अपराध [08 May 2010
 
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जीवन के पक्ष में, मृत्यु के विरुद्ध : जंतर मंतर पर जुटान

जाति से डर क्‍यों? [08 May 2010 | Read Comments | ] नवीन ♦ मैं विनोद जी से पूछना चाहता हूं कि देश में जितने अंतरजातीय विवाह सन 90 से लेकर आज तक हुए हैं, क्या उनकी संख्या 1950 से 90 तक से कम है? Read the full story »प्रियभांशु पर लाल-पीले [08
 
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आप जिसे अनैतिक कहते हैं, वह अपराध नहीं है

पांडेय की हिंदी बोगस [07 May 2010 | Read Comments | ] गिरीश मिश्र ♦ मैंने मैनेजर पांडेय की ताजा किताब ‘आलोचना की सामाजिकता’ देखी है। उससे मुझे लगा कि मैनेजर पांडे को तो हिंदी लिखने का शऊर भी नहीं है। Read the full story »अव्‍वल आने के बावजूद
 
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अंग्रेजी में फेल हुए, हिंदी में टॉप : मीडिया ने मुंह चुराया

सत्ता के ये दलाल [06 May 2010 | Read Comments | ] विश्‍वदीपक ♦ इन जैसे लोग अगर सेफ्टी वॉल्व की तरह काम नहीं करते तो नव उदारवादवाद की अंध समर्थक सरकार के लिए माओवादी सबसे बड़ा खतरा नहीं बनते। Read the full story »गोविंद मूनिस नहीं रहे [06 May
 
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