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प्राथमिक विद्यालय का संघर्ष

सन १९६१ में जब में कक्षा ९ में पहुंचा था, तभी से अब सन २००० में अपने व्यावसायिक कार्यों से निवृति पाने तक की लगभग ४० वर्ष की अवधि में प्रमुखतः गाँव से बाहर ही रहा हूँ यद्यपि यदा-कदा संपर्क बना रहा है. सन २००० में जब स्थायी निवास की दृष्टि से यहाँ लौटा तो
 
देवसूफी राम कु० बंसल
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आमरण भूख हड़ताल

बिहार स्थित बापू की पवित्र भूमि पश्चिम चम्पारण के भीतीहरवा गांधी आश्रम के कस्तूरबा विद्यालय में उपेक्षित बापू की यादों को विश्व स्तरीय सम्मान दिलाने हेतु अनिरूद्ध चैरासिया एवं उनके अन्य 12 साथी आमरण भूख हड़ताल पर बैठ गये है।
 
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