नर की लज्जा बदरंग गाय
लज्जा नारी का नहीं कवच लज्जा तो आभूषण कहाय. लज्जा स्वाभाविक भाव नहीं लज्जा तो पहनी ओढ़ी जाय. लज्जा नारी का मूलतत्त्व फिर भी गुण आभूषण कहाय. मैंने लज्जा को कवच कहा मेरी लज्जा अब मुँह छिपाय. नारी की लज्जा आभूषण नर की लज्जा बदरंग गाय. जो दूध बहुत
May 25 2010 09:40 AM



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