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किसे पुकार रहा था वो डूबता हुआ दिन-आबिदा-नसीर तुराबी

आबिदा जिस मौज में कहती हैं हम उसी मौज में सुनते हैं... डूबते उतराते गुनते हैं... समझ आती है बात थोड़ी -थोड़ी...बिन मोल बिकें…थम जाएँ किसी चादर का कोना पकड़…वहीं के हो रहें..धंस जाते हैं रेत में गहरे बहुत गहरे पैर जैसे..उतरे अँधेरी बावड़ी कोरा भरोसा लिए तब
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मैं बेकल ज़र्रा सहरा का, तू रहमत का दरिया साइयां........

आज लगभग महीने भर बाद आप से मुखातिब हूँ । कुछ व्यस्तता और कुछ आलस्य । तो फ़िर आइये आज इस खामोशी को तोड़ते है आबिदा जी की आवाज़ से । लेकिन इस रस गंगा के पान से पहले आबिदा जी के बारे में यह आलेख - The uncrowned Sufi Queen Pakistani singer Abida Parveen´s
 
एस. बी. सिंह
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मोसे बोलो न बोलो मेरी सुन या न सुन /आबिदा परवीन

इस बंदिश का असर कुछ यों हुआ प्रीत हो तो यूँ हो अधिकार हो तो ऐसा बेबसी इस हद तक पल किसी कल न पड़े शर्म लिहाज़ से दूर हिसाब - किताब से परे न ज़िद न जिरह खोने का डर लापता पाना ही पाना.. इश्क़ उस मकाम का जहाँ से वापसी नामुमकिन और तो और..वापसी के ख़्याल से भी