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अलसेट में हो गया लेट : नतीजा बवाल की रीमिक्स पहेली २००९ का

आदरणीय एवं प्रिय आत्मीयजनों, साल २००९ की और बवाल की अब तक की इकलौती “रीमिक्स" पहेली के नतीजे की घोषणा करते हुए हमें अत्यंत हर्ष हो रहा है। हालाँकि यह अपने निर्धारित समय से कई दिन बाद हो पा रही है क्योंकि इसके आयोजक पिछले दिनों ज़रा अलसेट में पड़े हुए थे,
 
लाल और बवाल (जुगलबन्दी)
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मेरे सपनों का एग्रिगेटर (बवाल)

हाय, ये भी कोई बात है मैथिली जी, कि दुनिया भर को अपनी बात कहने का मंच देने वाले होकर भी विजय पर्व पर हार मान बैठे। वो भी इसीलिए माननी पड़ी कि आपकी ब्लॉगवाणी ब्लॉग मंच से हटकर एक युद्ध क मैदान बन पड़ी थी। आज सबसे अधिक पसंद प्राप्त, आज सबसे ज्यादा पढ़े गए
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क्यूँ है..........? (लाल-और-बवाल)

वही हमारे वही तुम्हारे, तो फिर मचा ये बवाल क्यूँ है ? मेरे शहर की बुलंदियों की, ये हद से गिरती मिसाल क्यूँ है ?
 
लाल और बवाल (जुगलबन्दी)
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गणतंत्र दिवस पर शर्मिंदगी......... (लाल-एन-बवाल)

सना करें औ सलामियाँ हों , है सद्र शर्मिंदगी कहीं कुछ ? फ़तह का सामाँ दिखा रहे हों, के टाटे-पैबंदगी सभी कुछ !! --- समीर 'लाल 'और 'बवाल शब्दार्थ :- सना = स्तुति, वन्दना, प्रशंसा सलामियाँ = गणतंत्र दिवस पर होने वाली परेड सद्र = राष्ट्रपति और तमाम सियासतद