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आज न छोड़ेंगे बस हमजोली, खेलेंगे हम होली

होली का जिधर देखो माहौल बना हुआ है, रंग है गुलाल है, छोरे का, गोरी का तन लाल है। ऐसा समा बंधा है कि बस आनन्द साहब और राहुल देव का यह गाना ख़ुद ही याद आ रहा है और गाये जा रहा हूँ। आप गाओ और रंग उड़ाओ कि बच न जाने पाये कोई, होली है!!! Aaj Na ChhoRenge
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तेरे मेरे बीच में कैसा है ये बन्धन

आदमी मुसाफ़िर के बाद यह वह दूसरा गीत रहा जिसने आनन्द साहब की शोहरत में चार चाँद लगा दिये और उन्होंने दूसरी बार फ़िल्मफ़ेयर (filmfare) पुरस्कार जीत लिया। इतना ख़ूबसूरत प्रेम गीत है कि जब सुनिए दिल का रोम-रोम महक उठता है। Tere Mere Beech Kaisa Hai Yah Ban