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गीत: शब्द वही हैं ....

आनंदकृष्ण, जबलपुर शब्द वही हैं, बदल गई है केवल अर्थों की भाषा । छले हुए स्वप्नों में खोई सूनी आंखों की आशा । हवा चूमती थी पागल सी रेतीले नदिया तट को, जाने किसने झटका था चंदा की आवारा लट को । झूम-झूम नर्तन करते थे, नीलगिरि के उंचे पेड़- बगिया मुस्काई थी