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रहचुली

मेला म लगे हे रहचुलीतरी ऊपर घूमत सहेजे रहचुलीचेंवचेंव चेंव नरियावत हे रहचुलीबाबू, नोनी सबो ल बलावत हे रहचुलीपईसा म झूले बर बइठाए म रहचुलीआ रे टुरा झूल ले, कहिथे ये रहचुलीमीत-मयारू के मया ठउर ये रहचुलीआमा के ममहावत मऊर ये रहचुलीजिनगी के संसो-पीरा मेटाथे
 
संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari
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आम आदमी

आम आदमी के का औकात हेओखर बर मंहगाई हेगरीबी, रोग-राई हेदु:ख के दुनिया हेझुग्गी, अऊ कुरिया हेखैराती अस्पताल हेन दवई, न डॉक्टर, खस्ता हाल हेराशन दुकान हेन कोनो समान हेइसकुल हे लईका केभीड़ कोरी खईरखा केनईए गुरुजीपढ़ई नइ हाय हे शुरूजीथाना म, दफ्तर मनेता के घर
 
संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari