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बोली का जवाब गोली से देंगे मि.चिदंबरम!

गृह मंत्रालय ने उन बुद्धिजीवियों और स्वयंसेवी संगठनों को भुगतने की धमकी दी है जिनके बयानों या बातों से माओवादियों को 'बल' मिलता है। यानी माओवादियों के सशस्त्र विद्रोह का कोई माकूल तोड़ निकालने में अब तक नाकामयाब रही सरकार उन बुद्धिजीवियों का मुंह बंद कर
 
pankaj srivastava
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आदिवासी और अनादिवासी के बीच का फर्क

आदिवासियों के नाम पर अपना उल्लू सीधा करने वाले लोग यह नहीं जानते कि उन्हें आदिवासी कहकर वह पश्चिम की उस धारणा को और मजबूत करते हैं, जिसमें माना जाता है कि आर्य भारत के मूल निवासी नहीं थे, वह बाहर से आए थे और यहां आकर बस गए। अनजाने में वह उन्हें आदिवासी
 
अजय मूड़ौतिया
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मनुष्य बाघ संवाद / कविता / भारत डोगरा

[ प्रसिद्ध लेखक और सामाजिक कार्यकार्ता भारत डोगरा की यह कविता बाबा मायाराम की लिखी किताब ’सतपुड़ा बाशिन्दे’ से साभार ली गई है । ] पलामू के एक जंगल में एक ट्राइबल को एक टाइगर मिल गया दोनों के सम्बंध अच्छे नहीं थे उन दिनों तो भी पुराने दिनों की
 
अफ़लातून
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बंदूक का विकल्प हो तो आदिवासी लौट आएगा

बंदूक का विकल्प हो तो आदिवासी लौट आएगारमणिका गुप्तापिछले पांच वर्षों में माओवादी आन्दोलन 10 से 20 राज्यों के 223 जिलों में फैल गया हैµयानी भारत के एक तिहाई भू-भाग में। इनमें अधिकतर जिले आदिवासी बसाहटों वाले हैं।दरअसल नक्सलवाद ग्रामीण क्षेत्रा के किसानों
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वनवासी समाज का समग्र विकास

करोड़ो वनवासियों को खेती-बाड़ी, घर-बार व रोजी-रोटी का मोहताज बनाकर विस्थापित जीवन जीने को मजबूर कर दिया है। किन्तु वनवासी समाज को मिश्रवनों के विकास, वन सुरक्षा का दायित्व और स्वामित्व का समानाधिकार देने से वन, वनवासी समाज व राष्ट्र का सर्वांगीण विकास कैसे
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राज्य की नैतिकता और तमाम उलझे सवाल

माओवादियों की नीति और हिंसा के खिलाफ़ लिखे मेरे पिछले लेख को कुछ पाठकों ने उसे आदिवासियों के अधिकारों के खिलाफ़ भी समझ लिया। और यह भी समझ लिया कि मैं राज्य की हर उलटी-सीधी हिंसा और अन्याय का समर्थक हूँ। शायद लेख के शीर्षक से ऐसा बोध हुआ है। ऐसा नहीं है
 
अभय तिवारी
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विस्थापन के डर से सहमी हैं जंगल की बेटियाँ/ बाबा मायाराम

घने जंगल के बीच बसे एक गांव की सुमन 12 वीं कक्षा में पढ़ रही है। वह बोरी अभयारण्य के अंदर के काकड़ी गांव की है। पढने के लिए केसला आई है, जो मध्यप्रदेश के हो्शंगाबाद जिले का एक विकासखंड मुख्यालय है। यहां वह एक गर्ल्स शॉस्टल में रहकर पढ़ाई कर रही है। लेकि
 
अफ़लातून
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पालचित्‍तरिया - यात्रा संस्मरण का शेष भाग

रास्ते में चलते हुए डी]एस ने मुझे बताया कि हूर जी जिनकी कब्र हम देख कर आये हैं] वे एमबीसी में सूबेदार मेजर थे। हूर जी] ¼सूर जी-बागड़ी में ‘'स’ को ‘'ह’ उच्चारित किया जाता है) नवीन भाई के दादा थे। पालचित्‍तरिया काण्ड में उन्होंने फौज की एक टुकड़ी का नेतृत्व
 
हरि राम मीणा