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शपथ लो अब कोई हेमंत करकरे

नेस्तनाबूद कर दो उस शरीर को जो धर्म के नाम पर आतंक मचाये रेत के किलों से डहा दो उन महलों को जहां से उगतीं हैं धर्मांध पौध...........! कोई पाप न होगा अगर तुम एक बार बचा लोगे एक करकरे को तुम जो नि:शब्द खड़े धर्म के मामलों पर कुतर्क सुन लेते हो तुम जो खि
 
गिरीश बिल्लोरे 'मुकुल'