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उल्टा आदमखोर चोर कोतवाल को डांटे

हमारा आपको अखबार पढ़ाने या फिर कोई कहानी सुनाने का कोईइरादा नहीं।बस इरादा है तो आपको सच्चाई का साक्षातकार करवाने का ।आपको हमने बताया कि किस तरह UPA सरकार ने आतंकवादियों को फायदा पहुंचाने के लिए सेना,पुलिस व देसभक्तों पर हमला किया उन्हें पकड़कर
 
सुनील दत्त
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पाकिस्तान को ख़त्म कर सकता है आतंकवाद

शेष नारायण सिंह पाकिस्तान में अहमदिया समुदाय लोगों की दो मस्जिदों में शुक्रवार की नमाज़ के वक़्त जो हमला हुआ वह पाकिस्तानी समाज में व्याप्त असहिष्णुता को एक बार भी फिर रेखांकित कर देता है .. अहमदिया समुदाय के लोग अपने आप को मुसलमान कहते हैं लेकिन
 
शेष नारायण सिंह
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माओवादी उग्रवादीयों को प्रश्रय दे रही है रेलमंत्री

ममता बनर्जी रेलमंत्री के रूप में अपनी जिम्मेदारियों का ईमानदारी से निर्वाह करने के स्थान पर दिल्ली की रेलगाडी के सहारें बंगाल विधानसभा की वेतरणी पार करने का ख्वाब देखते हाथ पर हाथ धरे बैठी हुवी है। उल्टा चोर कोतवाल को ड़ाटे मुहावरे को चरितार्थ करते हुवे
 
परेश टोकेकर 'कबीरा'
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बेकाबू माओवादी-घबराई सरकार:फिर कैसे हो समाधान

माओवादी अथवा नक्सली हिंसा के विरुद्ध केन्द्र सरकार का कुछ राज्य सरकारों के सहयोग से चलाया जाने वाला आप्रेशन ग्रीन हंट जारी है। इस आप्रेशनContinue Reading »
 
tanveerjafri1
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कश्मीर घाटी के लोग आज़ादी चाहते हैं! यह कैसी रिपोर्टिंग?

बीबीसी की हिन्दी सेवा की आज की मुख्य खबर है - भारत प्रशासित (यह ब्रिटिश सेवा है इसलिए ऐसा लिखती है) कश्मीर घाटी के लोग आज़ादी चाहते हैं. यह खबर एक सर्वे पर आधारित है जिसे एक ब्रितानी कथाकथित अकादमिक ने किया है. इस खबर पर नज़र डालें तो इसमें तथ्यात्मक भूलें
 
पंकज बेंगाणी
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अभी और कितनों के मरने का इंतज़ार है जनाब....

इस बार बस की बस उड़ा दी गई और लगभग 50 के आसपास लोग मारे गये। नागरिकों द्वारा समाचारों में साफ-साफ कहा जा रहा है कि यदि बस में पुलिस वाले नहीं बैठे होते तो बस को नक्सलियों ने उड़ाया नहीं होता। नागरिकों का आगे यह भी कहना है कि अब यदि बस में पुलिस वाले
 
डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
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अजमल आमिर कसाब

अजमल आमिर कसाब। है तो एक आतंकी का नाम लेकिन आज उसे बच्चा बच्चा जानता है। बचपन में सुना था कि या तो बहुत अच्छे बन जाओ या फिर बहुत बुरे। जो बहुत अच्छा काम करते हैं या तो वे याद रखे जाते हैं या फिर दो दुष्टता की हद पार कर जाते हैं वे जाने जाते हैं। बाकी बीच
 
pankaj mishra
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आतंकवाद, नक्सलवाद, क्षेत्रवाद --- देश की तीन उत्पाती सेवाएँ

नक्सलवाद, आतंकवाद, क्षेत्रवाद के साथ ही बहुत बार मन में सवाल उठे कि क्या कभी ये सब देश से समाप्त भी होगा?यह एक ऐसा प्रश्न है जिस पर किसी का भी ध्यान जाता है किन्तु इसके जवाब का बस इंतजार ही करता रहता है। होना तो यह चाहिए कि इस तरह के विवादों के मूल को
 
डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
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आतंकवाद कहाँ नहीं है?

हर किसी अप्रिय घटना के घटित होने पर,हम कोसते हैंआतंकियों को.गालियाँ हम क्यों देते हैं?जिनको हमने देखा ही  नहीं.आतंकवाद के नाम परचंद लोगों कोदेखते रहते हैं,अरे ये आतंकी कब नहीं थे?कहाँ नहीं थे?हर काल में रहे हैं.हर  बार किसी नए नाम
 
रेखा श्रीवास्तव
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मौत लपेटी हुई कविता....हिस्सा हिलाल -एक साहसी कवियत्री.

महिलाओं की स्थिती पर हम सभी बातें कर रहे थे, और मेरी पिछली पोस्ट पर मैने कुछ लिखा भी था, कुछ एकेडेमिक ,कुछ व्यक्तिगत. साथ में ही एक और परिचित महिला की हम बातें करने जा रहे थे.मगर अभी रविवार को मैने कहीं कुछ पढा और साथ ही नेट पर जाकर कुछ और जानकारी ली और
 
दिलीप कवठेकर
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भारत -पाक वार्ता, ढाक के तीन पात

शेष नारायण सिंह अमरीका की तरफ से बार बार की गयी पहल के बाद करीब १४ महीने बाद ,भारत और पाकिस्तान के बीच एक बार फिर बात-चीत का सिलसिला शुरू हो गया है .विदेश सचिव स्तर की बात-चीत से कुछ नहीं निकलेगा ,यह सबको मालूम था . लेकिन दोनों देशों की जनता के लिए यह एक
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ऐसे खत्म होगा लाल आतंक

देश के लिए आंतरिक चुनौती बने इस लाल आतंक का क्या कोई इलाज है? हिंसक नक्सलवाद से पार पाने का एक सफल प्रयोग भारत के ही एक कोने में हुआ है. यह कोना जहाँ नक्सलवाद का उदय हुआ वहाँ से ठीक विपरित दिशा में है. यहाँ के लोगों ने युद्ध व हथियार छोड़ कर शांति और
 
संजय बेंगाणी
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आखिर भारत का संयम खत्म हो ही गया

कुछ दिन पहले पाकिस्तान में अमेरिका के रक्षा मंत्री राबर्ट गेट्स ने यह कहा था कि कि भारत का संयम खत्म हो सकता है। इसका सभी समाचार माध्यमों ने यह अर्थ निकाला था कि भारत पाकिस्तान की तरफ से किसी भी प्रकार के आतंकी हमले के लिये जैसे को तैसा की तर्ज पर
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पाकिस्तान का पागलपन

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी ने यह कहकर एक बार फिर अपनी धूर्तता का परिचय दिया है कि वे भारत में मुंबई जैसे हमलों को रोकने की गारंटी नहीं ले सकते। उनके इस बयान पर किसी को आश्चर्य नहीं होना चाहिए, लेकिन इस बार उन्होंने अमेरिकी रक्षा मंत्री
 
अवधेश आकोदिया
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प्रयत्न!

नुकतीच एक दिलासादाय़ी बातमी वाचनात आली. ती अशी की, अमेरिकेत स्थायीक झालेल्या भारतीयांनी मिळून एक “दबाव गट” , (टास्क फ़ोर्स ) स्थापन केला आहे, आणि त्यांचे सुमारे १५० जणांचे प्रतिनिधी मंडळ आज ओबामा यांना भेटून पाकिस्तान वर कारवाई करणे कसे गरजेचे आहे, त्याचा
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अमन की आशा? जब तक सांस, तब तक आस!

गुलज़ार साहब की इस बेहद खूबसूरत कविता के उस अंश पर नज़र अटक गयी।"सरहदों पे जो आये अबके तो लौट के न जाए कोई"इसमें नयी बात कुछ नहीं है, पाकिस्तानी घुसपैठिये और अवैध रूप से भारत में रह रहे पाकिस्तानियों ने तो इस बात को हमेशा से अपनाया है :)'अमन की आशा' एक
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बम और हम! भाग २

आपको-शायद बहुतो को यह बात बुरी लगेगी.लेकिन एक बात जो बरी साफ है,कह दूं की आतंकवाद के लिए भले ही बीज विदेशी हो,जमीन हमारी है.हमने भी जमीन ऐसी उपजाऊ बना रखी है,की विदेशी आतंक का बीज आसानी से बो रहे है और हम है की जमीन को और उपजाऊ बना रहे है अब महाराष्ट
 
पिंटू कुमार
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'ठेकेदारों' की शामत...

कहते हैं नया आता है तो पुराना जाता है। ये बात 'ठेकेदारी' पर भी लागू होती है। अब देखिए ना, हाल में मुंबई आतंकी हमलों के बाद आम आदमी की सुरक्षा के नए ठेकेदारों ने विरोध की मोमबत्तियां क्या जलाईं.....उसकी आंच से हमारी सुरक्षा के असली ठेकेदार (नेता) तपने
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वरना पूरे देश में फैल जाएगा आतंकवाद

नवरात्र की पूर्व संध्या पर सोमवार को गुजरात के मोडासा (साबरकांठा) और महाराष्ट्र के मालेगांव में हुए विस्फोटों में सात लोगों की मौत हो गई और सौ से अधिक लोग घायल हो गए। स्पष्ट है दिल्ली के चंद दिनों बाद ही आतंकियों ने गुजरात और महाराष्ट्र को निशाना बना
 
रंजन राजन
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आतंक को इंडियन बनने से रोकना होगा

जब पड़ोसी के घर क्राइम होता है तो हम पुलिस और कानून-व्यवस्था की खामियों को कोसते हैं। उसी पड़ोसी के घर जब आग लगती है तो हम पानी डाल कर आग बुझाने में जुट जाते हैं, योंकि हमें डर होता है कि पड़ोसी के घर की आग कहीं हमारे घर को भी न जला दे। लेकिन आज हालत
 
रंजन राजन
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वीसी साहब! आपके इरादे नेक नहीं लगते

कुछ लोग काम करने की जगह ढिंढोरा ज्यादा पीटते हैं। ऐसा ही कुछ जामिया मिलिया इसलामिया विश्वविद्यालय के कुलपति मुशीरुल हसन कर रहे हैं। आपने पहले बकायदा संवाददाता सम्मेलन बुलाकर धमाकेदार ऐलान किया कि आतंकी बताए जा रहे अपने दो छात्रों को आप कानूनी मदद मुह
 
रंजन राजन
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उदासीन और लापरवाह मानसिकता से बाहर निकलना होगा

पिछले कई महीनों से पंजाब से लेकर हरियाणा और उत्तर प्रदेश में रेलवे स्टेेशन और धार्मिक स्थल उड़ाने की धमकी भरे पत्र मिलते रहे हैं। एक-दो बार इन पत्रों को गंभीरता से लिया गया लेकिन जब कोई वारदात नहीं हुई तो ऐसे पत्रों को गंभीरता से नहीं लिया जाने लगा।
 
ओमप्रकाश तिवारी
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या हम धर्मनिरपेक्ष होने की कीमत चुका रहे हैं?

इस बार मानवता के दुश्मनों ने देश की राजधानी दिल्ली को निशाना बनया है। लगातार चार धमाके करके करीब २५ लोगों की जान ले ली और १०० से अधिक लोगों को घायल कर दिया। जेहाद के नाम पर यह ऐसा खून -खराबा है जिसकी जितनी निंदा की जाए कम ही होगी। निर्दोष लोगों की जा
 
ओमप्रकाश तिवारी
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आतंक और एकता

राम पुनियानीपिछले 26 नवम्बर को मुंबई पर हुए आतंकवादी हमले ने शहर के सामाजिक ताने-बाने को छिन्न-भिन्न कर दिया है. जो जानें गईं, उनकी तो कोई कीमत लगाई ही नहीं जा सकती, परंतु आम जनता ने राजनैतिक नेतृत्व पर जो विश्वास खोया है, उसकी भी भारी कीमत हमारे देश
 
rajesh chandra
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Terror: The Aftermath

भाई आनंद पटवर्धन के इस आलेख को टाइम्स ऑफ़ इंडिया ने अस्वीकृत कर दिया और हिंदुस्तान टाइम्स ने स्वीकार करके भी नहीं छापा। आख़िर ऐसा क्या था इसमें जो उन्हें आपत्तिजनक लगा....}The attack on Mumbai is over. Nearly 200 dead. And now, after heart-rending st
 
rajesh chandra
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देशद्रोही

संदीप पांडेयराज ठाकरे हिन्दुत्व की राजनीति की खुराक पर बड़े हुए हैं. हिन्दुत्व की राजनीति की बुनियाद मुस्लिम विरोध पर टिकी हुई है. कभी-कभी यह इसाई विरोध के रूप में भी दिखाई देती है. पर राज ठाकरे को ऐसा समझ में आया कि शिव सेना से अलग होने एवं महाराष्ट्
 
rajesh chandra
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The Simmering Dissent

The collective logic behind Naxalism is that what could not be demanded from the rotten system, that could be at best extracted with might. The results of the former are all known, with abject deprivation, be it fundamental rights of sustenance, food,
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इस्लाम के प्रति ग्लोबल मीडिया में घृणा कैसे आयी - 2-

आज अमरीका ने अरब देशों और फिलिस्तीनियों की सुरक्षा की बजाय इजरायल की सुरक्षा के सवाल पर आम राय बना ली है।इस इलाके में अमरीका पश्चिम का वर्चस्व स्थापित करना चाहता है।वे यह भ्रम पैदा कर रहे हैं कि ' ओरिएण्ट ' के ऊपर ' पश्चिम ' का राज चलेगा।दूसरा भ्रम य
 
jagadishwar chaturvedi
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अमेरि‍की हवाई अड़डों पर भाव-भंगि‍मा पुलि‍स

अमेरि‍की हवाई अड़डों पर इन दि‍नों एक वि‍लक्षण कि‍स्‍म की पुलि‍स पहरा दे रही है,यह ऐसी पुलि‍स है जो आने -जाने वाले लोगों पर नजर रखती है, यह नजरदारी भी वि‍लक्षण है। ये पुलि‍स वाले यात्री के व्‍यवहार को देखकर ठीक करते हैं कि‍ वह आदमी कैसा है, आतंकवादी ह
 
jagadishwar chaturvedi
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26 /11 के पेज 3 शूरमाओं का चारण काव्‍य

टेलीवि‍जन पर क्रोध और प्रति‍वाद से तमतमाए चेहरे गायब हैं। सड़कों ,गली, मुहल्‍लों, शहरों से प्रति‍वाद उठकर चैनलों के पर्दे पर पहुँच गया है। सड़कें सूनी हैं, बसों में कोई चर्चा नहीं है, लोकल ट्रेन में सन्‍नाटा है,लेकि‍न टेलीवि‍जन में गरमागरम बातें हो र
 
jagadishwar chaturvedi
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२६/११ की गौरवपूर्ण घटना और चूतिया नंद की कथा

कल २६ / ११ की बरसी को भारतवर्ष के चुनिन्दा शहरों में चुनिन्दा टीवी चैनलों और टेलीकोम कंपनियों के माध्यम से सवेदनशील व जुझारू देशभक्तों ने , जो राष्ट्र की रक्षा के लिए कर्मठता पूर्वक मोमबत्ती और मोबाइल थामे खड़े रहे , बड़े हीं धूमधाम और हर्षौल्लास के स
 
सुधाकर सिंह
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राजदीप सरदेसाई -बरखादत्‍त का टीवी स्‍वॉंग

मुंबई आतंकी हमले की बरसी पर टीवी चैनलों पर बैठे गृहमंत्री चि‍दम्‍बरम् बौने और झूठे लग रह रहे थे। कई चैनलों पर उनका साक्षात्‍कार दि‍खाया जा रहा था और चैनलों के संपादक बगैर कि‍सी होमवर्क के केन्‍द्र सरकार के पब्‍लि‍क रि‍लेशन ऑफीसर का काम कर रहे थे। इस
 
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एक साल पहले 26 / 11 के दि‍न टीवी चैनलों का कवरेज (3)

टीवी कवरेज से कई बातें सामने आयी हैं। पहली बात यह सामने आयी है कि हमारा टीवी जगत अभी तक पेशेवर रिपोर्टिंग में सक्षम नहीं है। खासकर आतंकवाद जैसी आपदा की रिपोर्टिंग के मामले में इसका नौसिखियापन पूरी तरह सामने आ चुका है। भारत - पाक संबंधों को बनाने से ज
 
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एक साल पहले 26 / 11 के दि‍न टीवी चैनलों का कवरेज (2)

आतंकी हमले की इमेज जब प्रस्तुत की जाती है तो देखना होगा कि क्या पेश किया जा रहा है और किस भाषा में पेश किया ज रहा है और लोग किस रूप में ग्रहण कर रहे हैं। मुंबई की आतंकी घटना के 59 घंटे के कवरेज में आरंभ किसी इमेज से नहीं होता है बल्कि सबसे पहले भाषा
 
jagadishwar chaturvedi
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एक साल पहले 26 / 11 के दि‍न टीवी चैनलों का कवरेज ( 1)

आज से एक साल पहले इस समय मुंबई आतंकी दहशत और हमले से तबाह पड़ा था। आज मुंबई शांत और सामान्य है। भारत-पाक संबंध गरम और नरम हैं। सारा देश इस हमले में मारे गए शहीदों को श्रद्धासुमन अर्पित कर रहा है। शहर अपनी धुन में लौट आया है। एक साल पहले कि‍स तरह का क
 
jagadishwar chaturvedi
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26/11 : पश्चिम से ही हमेशा हमला हुआ है भारत पर

अगर आप इतिहास उठा कर देखें तो पायेंगे कि भारत भूमि पर केवल एक बार को छोड़ कर हमेशा  पश्चिमी सीमा से हमला होता रहा है। केवल 1962 में ही उत्तर की ओर से चीन द्वारा हमला किया गया था। सिकन्दर, मुहम्मद बिन कासिम, महमूद गजनवी, मुहम्मद गौरी, तामूर लंग,
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आइये ! आतंकवाद के ख़िलाफ़ एक हाथ हम भी उठायें ---

कभी कभी आदमी सोचता कुछ और है, और हो कुछ और जाता है। हम निकलते हैं कहीं के लिए , और नियति हमें ले कहीं और जाती है। कुछ ऐसा ही हुआ आज हमारे साथ। जाना कहीं और था, लेकिन जाने कौन सी अद्रश्य शक्ति हमें खींच ले गई , इंडिया गेट की ओर । वहां जाकर पता चला की
 
डॉ टी एस दराल
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मुंबई 26 / 11 एक साल का मीडि‍या खेल

मुम्‍बई पर आतंकी हमले को एक साल होने जा रहा है। इस एक साल में मीडि‍या की भूमि‍का क्‍या रही है। सरकार की भूमि‍का क्‍या रही है और हम दर्शकों की भूमि‍का क्‍या रही है, इत्‍यादि‍ सवालों पर गंभीरता के साथ सोचने की जरूरत है। मुंबई की आतंकी घटना के गुजर जाने
 
jagadishwar chaturvedi
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रोटी-पानी-बिजली-सड़क चाहिये, या पेशाब के बाद सुखाने के लिये ढेलों पर सब्सिडी ? (वहाबी आंदोलन के बहाने)

कल के ‘द हिन्दू’ में एक लेख पढ़ा। प्रसिद्ध विधिवेत्ता राम जेठमलानी ने नई दिल्ली में आतंकवाद पर हुए कानूनवेत्ताओं के एक अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में ‘वहाबी आन्दोलन’ और उग्रवाद में तार जोड़ने की कोशिश क्या की, सउदी राजदूत फैसल-अल-तराद ऐंठकर वॉकआउट कर गये
 
कार्तिकेय मिश्र (Kartikeya Mishra)