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कसाब और अफजल को शीघ्र फांसी देशहित में

26/11 मुंबई हमलों के संदर्भ में कानूनी प्रक्रिया ने यह प्रमाणित कर दिया है कि पाकिस्तान न केवल जिहादी आतंकवाद की फौज तैयार कर रहा है बल्कि उसे भारत के विरुद्ध खुले रूप में इस्तेमाल भी कर रहा है। आतंकवाद के प्रति यूपीए सरकार की नरम नीतियों के कारण ही
 
पवन कुमार अरविन्द
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सडकों पर आतंक

तंकवाद एक ऐसा शब्द जिसे सुनने के साथ ही हमारी नजरों के सामने आते हैं लहुलुहान बच्चे,बूढ़े और जवान। बम के धमाके, गोलियों से भूने हुए लोग और जीर्ण-शीर्ण हुई इमारतें। जो कि कभी इतिहास का हिस्सा बनती। क्या है यह आतंकवाद, दहशतगर्दी या वहशीपन जो कि इंसान को
 
सड़क मित्र
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कसाब दोषी

जैसा कि सभी को पहले से ही पता था कि २६/११ हमलों का मुख्य आरोपी अजमल कसाब किसी भी तरह से सज़ा से नहीं बच सकता है आज उसकी पुष्टि हो ही गयी. जिस तरह से उसे खुलेआम हथियार लेकर लोगों कि हत्या करते हुए फुटेज सुबूत के तौर पर थे और अन्य बहुत सारे गवाहों ने उसे
 
डा०आशुतोष शुक्ल
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पाक से वार्ता नहीं ...

अगले हफ्ते सार्क देशों की बैठक में भाग लेने के लिए थिम्पू जाने पर मनमोहन सिंह और गिलानी के बीच बात चीत का कोई कार्यक्रम अभी नहीं बन सका है. भारत सरकार ने इस बात की पुष्टि भी कर दी है कि अभी तक पाक से कोई प्रस्ताव भी नहीं मिला है. मुंबई हमलों के बाद से ही
 
डा०आशुतोष शुक्ल
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गज़ब कानून..१...आतंकके ख़िलाफ़ जंग..

इस ज़रूरी संस्मरण को लिखना चाहती हूँ...वजह है अपने१५० साल पुराने, इंडियन एविडेंस एक्ट,(IEA) कलम २५ और २७ के तहेत बने कानून जिन्हें बदल ने की निहायत आवश्यकता है....इन क़ानूनों के रहते हम आतंकवाद से निगडित या अन्य तस्करीसे निजाद पाही नही सकते...इन क़ानूनों
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कुछ भी गलत-सलत मत लिखो प्लीज

आपके साथ यही समस्या है, झट से किसी नतीजे पर पहुँच जाते हो और किसी को भी दोष देने लगते हो. आप ठहरे अज्ञानी. महान पत्रकार, चिंतक, सेक्युलर मीडिया कर्मी हमारी आँखे हमारी आँखे खोलने वाला लेख लिखा है...
 
संजय बेंगाणी
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हाई वोल्टेज ड्रामा

बहुत जल्दबाजी होगी यह कहना की मुंबई में आतंकवादियों द्वारा यह हाई वोल्टेज ड्रामा के पीछे क्या राज थी ? क्या यह पुरी अर्थव्यवस्था पर आतंक था या फिर आम जनमानस पर या फिर किसी राजनीत की कुटनितये तमाम सवालों का जवाब न तो सरकार के पास है न जनता के पास और न
 
सुरेन्द्र Verma
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एन एस जी आधुनिक होगी....

एन एस जी की रजत जयंती पर चिदंबरम ने कहा कि इस बल के २६/११ के आतंकी हमले में किए गए उत्तम प्रयास के बाद अब बल को पूरी तरह से आधुनिक किया जा रहा है। आज के युग में आतंकियों के पास बहुत आधुनिक हथियार होते हैं और कई बार उन्हें पड़ने और ढूँढने के लिए भी लेज
 
डा०आशुतोष शुक्ल
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कश्मीर में साहस ...

राजौरी जिले की रुखसाना ने जिस साहस का परिचय देकर आतंकियों के हौसले को पस्त कर दिया वह निश्चित ही प्रशंसा का विषय है। एक १८ साल की लड़की ने अपने साहस से उसके माता पिता को बेरहमी से पीट रहे आतंकियों से मोर्चा लिया और अपने भाई के सहयोग से एक आतंकी को मा
 
डा०आशुतोष शुक्ल
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गुनहगार

तमाचे से जैसे उसके कान सुन्न से हो गए थे । हाथ लगा कर देखा तो कुछ खून का आभास हुआ होठों पर । अब उसने चारों तरफ़ देखने की कोशिश की तो पाया मारने वाला जा चुका था और आस पास इकट्ठा लोग उसी की तरफ़ देखे जा रहे थे।ये दिन का कोई एक समय और भरे हुए बाजार में कोई
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2003 मुंबई विस्फोटःपोटा का सोटा

अखिर में पोटा का सोटा आतंकवादियों पर चल ही गया। मुझे बहुत खुशी हुई कि कोर्ट ने आतंकवादियों को फांसी की सज़ा सुनाई। मुंबई की एक विशेष पोटा अदालत ने वर्ष 2003 में हुए बम धमाकों के लिए दोषी पाए गए तीनों व्यक्तियों को मौत की सज़ा सुनाई दी। इससे पहले तीन
 
पवन कुमार अरविन्द (Pawan Kumar Arvind)
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पाक का मानना

आख़िर पाक ने जो दस्तावेज भारत को सौंपे हैं उनमें उसने मान ही लिया की पाक के आतंकी संगठनों ने ही मुंबई हमले की साजिश रची थी। अभी तक जिस तरह से पाक इन बातों से मुकर रहा था उसको देखते हुए यह भारत की एक बड़ी कामयाबी तो कही ही जा सकती है। आज जब सारे विश्व
 
डा०आशुतोष शुक्ल
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जो तटस्थ रहेगा समय लिखेगा उसका भी अपराध....

श्री लंकाई क्रिकेट खिलाड़ियों की ऊपर आतंकियों द्वारा किया गया हमला निस्संदेह सदमे जैसा था | जिसने भी सुना बिना चौंके नहीं रह सका | क्रिकेट न देखनेवालों के लिए भी दुःख और आक्रोश की बात थी, फ़िर क्रिकेट प्रेमी तो थोडी देर के हताशा और गुस्से से भर गए |ले
 
अर्कजेश *Arkjesh*
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आतंक को कौन समर्थन देगा ?

पोस्‍‍ट नंबर 3 अरे‍ टिक्‍कू जी, कहां जा रहे हो। पीछे से आवाज देकर चौबे काका ने बुलाया। काका राम राम। का बात है। अरे भाई, कल जो तुमने दिमाग में एक जिज्ञासा बैठा दी है उसका समाधान तो दे दो। बताओ तो अमरीकी गोरों ने ओबामा में ऐसा क्‍या देखा कि उसको ओसामा
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हम और वो

इधर हम जिंदगी के कायल हैं उधर वो जान के भी दुष्मन है । इधर हम प्रेम गीत गाते है वो उधर सर पे बांधे कफन हैं । हाथ जो हम बढायें दोस्ती का वो तो थामें दुष्मनी का दामन हैं । भोले नादान मासूमों को वो बनाते जाते दुश्मने अमन है । हम हैं जम्हूरियत की संतानें
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