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आज भी याद है मुझको

तेरा यूं मुस्कुरा के भाग जाना आज भी याद है मुझकोतेरा यूं हिचकिचा के ख़ामोश कर जाना आज भी याद है मुझकोतेरा आंखे दिखा के भूल जाना आज भी याद है मुझकोतेरा गलती करके माफी मांगना आज भी याद है मुझकोतेरी आंखों की खामोशियों का शोर आज भी याद है मुझकोतेरा होठों की
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आज भी

आज भी बचपन से, उनसे सुनती रही एक माँ के न होने कि व्यथा महसूस करती रही, उनकी ये वेदना जो, कभी व्यथित कर देती थी मुझे भी इससे भी ज्यादा व्यथित होती मैं जब सुनती उनकी प्रभु से प्रार्थना जो दुःख मुझ बिन माँ के बच्चे ने पाया मेरे  बच्चे कभ
 
रचना दीक्षित
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