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जनपद री बोल्यां है मिणियां, माळा राजस्थानी।

समाचार सन्दर्भ- राजस्थानी को बचाना जरूरी(समाचार पढऩे के लिए क्लिक करें।)जनपद री बोल्यां है मिणियां,माळा राजस्थानी।-सत्यनारायण सोनी, प्राध्यापक-हिन्दीमंत्रियों और पूर्व मंत्रियों ने अपने बयानों में राजस्थानी को बचाना जरूरी माना है और दबी जुबान में कुछ
 
राजस्थानी रांधण
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आग होली की

पोस्‍ट नंबर - 20 *आग* कहीं दूर …… दूर कहीं …… । एक बहुत बड़े ज्‍वालामुखी का विस्‍फोट होता है, जंगलों में आग लग जाती है, और एक तूफान समंदर को , अपनी बाहों में जकड़ लेता है। फिर कहीं दूर किसी नाव में , खारा पानी भर जाता है। जो न उलीचने से खत्‍म होता है और
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मवार्क (MAVARK )

पोस्‍ट नंबर - 20 *आग* कहीं दूर …… दूर कहीं …… । एक बहुत बड़े ज्‍वालामुखी का विस्‍फोट होता है, जंगलों में आग लग जाती है, और एक तूफान समंदर को , अपनी बाहों में जकड़ लेता है। फिर कहीं दूर किसी नाव में , खारा पानी भर जाता है। जो न उलीचने से खत्‍म होता है और
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...फाग आग आँच

.. फाग आग आँचनरम हुई कड़ियाँ- फिर टूटीं।पसर गया प्रेमशब्द शब्द आखर आखर।... तूने क्या, कैसे, क्यों बाँध रखा था ?==========================================
 
गिरिजेश राव
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न हमारी आग का रंग बदलेगा – महेन्द्र नेह

न हमारी आग का रंग बदलेगा – महेन्द्र नेह ( a kavita poster by ravi kumar, rawatbhata) शब्दों के कुछ समूह हमारी चेतना पर अचानक एक हथौडे़ की तरह पड़ते हैं, और हमें बुरी तरहझिंझोड़ डालते हैं. दरअसल हथौडे़ की तरह पड़ने और बुरी तरह झिंझोड़ डालने वाली
 
रवि कुमार, रावतभाटा
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उसकी प्यास न पानी बनी न आग

उस रात ..................... वो अकेली नहीं ........................... उस के साथ रात भी जली थी ....................... मैंने उसे आग अर्पित की .......................... वो और भी सर्द हुई ................................ समन्दर की बात की
 
MANVINDER BHIMBER
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त्रिवेणीनुमा-२

बदन-ए-ग़र्द में, मैं जड़ पकड़ता जा रहा हूँमैं खुद किरदार की पहचान बनता जा रहा हूँहूँ असीर-ए-उम्र आलम का, ये जाँ छूटे, क़रार आये।(बदन-ए-गर्द: मिट्टी का शरीर; असीर-ए-उम्र: उम्रकैदी; आलम: दुनिया) *-*-*-*-*होंठ सुलगे जो मेरे, आग ज़माने में लगीफिर से इक उम्र,
 
अपूर्व
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500 करोड़ की रही देव दिवाली ...देश की सबसे भीषण आग

कल देव दिवाली थी ...गोधुली वेला में तुलसी पूजन कर दीपो और कृत्रिम रौशनी की झिलमिलाहट से प्रफ्फुलित होते हए टेलीविजन ऑन किया तो स्तब्ध रह गए ...सीतापुर में भीषण आग ...देश की अब तक की सबसे भयावह आग.... इंडियन आयल के डिपो में ...जबरदस्त धमाकों ने भूकंप
 
वाणी गीत
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कब बुजेगी ये आग ??????????????

जयपुर में भीषण जयपुरः भयावह आग में झुलसे हुए लोगों की तस्वीरें... पता नही अब उन लोगो पर क्या बीत रही होगी जो इस आग से लड़ रहे हें ???????
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पानी में आग!

पढ़ें एक व्यंग्य रचना- पानी में आग! लिंक है- http://rachanakar.blogspot.com/2009/10/blog-post_10.html कहते हैं, मुंबई शहर हादसों का शहर है। इन हादसों में सबसे बड़ा हादसा यह हुआ कि यहाँ पानी में आग लग गई। अब तक तो आग जंगल में लगती थी, पेट में लगती थी।
 
Vibha Rani
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नम हैं आज तक यादों के सूखे पत्ते

मुझे क्या हुआ है मुझे कुछ पता नहीं है क्या मेरे दर्दो-ग़म की कोई दवा नहीं है यह उदासियों की शामें बहुत उदास हैं मेरे नसीब में क्या मौसमे-वज़ा1 नहीं है आफ़त यह हम पर टूटकर आयी है इसे देखने को क्या कोई ख़ुदा नहीं है सब आश्ना आज ना’आश्ना2 बन गये हैं ऐ
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आग का समंदर है नाव मोम वाली है ...

पार जा सकेंगे हम ,सोच ही निराली है । आग का समंदर है नाव मोम वाली है । हर तरफ़ अंधेरो की क्या करें शिकायत हम - लौ दिये की गिरवी है कहने को दिवाली है । खून कैसे बिखरा है माँ के श्वेत आँचल पर- बापू की अहिंसा आज तक सवाली है। घी घडो में लिपटा है और पेट खा
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जो इश्क़ की आग भड़क उठी है

जो इश्क़ की आग भड़क उठी है जैसे मैं शोलों में जल रहा हूँ तेरे बदन की कशिश का है जादू देखकर तुझ को मचल रहा हूँ मुझे है ख़ाहिशो-तमन्ना1 तेरी मैं उम्मीद को मसल रहा हूँ एक यह ख़ाब मैं देखता हूँ कि तेरी मरमरीं बाँहों में पिघल रहा हूँ शब्दार्थ: 1.
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आग और पानी [इस्पात नगरी ५]

इस्पात नगरी पिट्सबर्ग पर यह नई कड़ी मेरे वर्तमान निवास स्थल से आपका परिचय कराने का एक प्रयास है। अब तक की कड़ियाँ यहाँ उपलब्ध हैं: खंड १; खंड २; खंड ३; खंड ४ इस्पात नगरी के धरातल के नीचे छिपकर बहने वाली ऐक्विफर नदी और सतह के ऊपर की त्रिवेणी की चर्चा मै
 
Smart Indian - स्मार्ट इंडियन
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