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एक मुख़्तसर सी मुलाकात....'कैलाश सेंगर' के साथ

पिछले कुछ दिन काफी व्यस्तता भरे थे , एक तो बच्चों की छुट्टियाँ,उनकी फरमाईशें और उनमें आकाशवाणी से एक कहानी की फरमाईश भी शामिल .कई मित्र नाराज़ भी होंगे...उनलोगों के इतने शौक और मेहनत से लिखे पोस्ट्स भी नहीं देख पायी. ब्लॉगजगत में भी रेडियो से जुड़े कई लोग
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किस काम की आकाशवाणी

आकाशवाणी के दिल्ली केंद्र के कार्यक्रम आसपास के 300-400 किलोमीटर के इलाकों में बड़े शौक से सुने जाते हैं। और इन इलाकों की ज़्यादातर आबादी गांवों में रहती है। इस हिसाब से ज़रुरत ये बनती है कि गांव के आम लोगों के, महिलाओं के, किसानों के मतलब के भी
 
सूबेदार
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किस काम की आकाशवाणी

आकाशवाणी के दिल्ली केंद्र के कार्यक्रम आसपास के 300-400 किलोमीटर के इलाकों में बड़े शौक से सुने जाते हैं। और इन इलाकों की ज़्यादातर आबादी गांवों में रहती है। इस हिसाब से ज़रुरत ये बनती है कि गांव के आम लोगों के, महिलाओं के, किसानों के मतलब के भी
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आंसू अगर बिकते कहीं,होता बहुत धनवान मैं

-डॉ. अशोक प्रियरंजन'हर झुर्रियों से झांकते सौ-सौ दिवाकर ओज के, अपना सफर पूरा किया, अब पंख किरणों के थके।Ó 'राजस्थान दर्पणÓ में प्रकाशित इन पंक्तियों के रचयिता मेरठ के साहित्यकार और पत्रकार ८० वर्षीय विष्णु खन्ना को गए एक वर्ष बीत गया । उन्होंने १० अगस्त
 
dr ashok kumar mishra