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आंच - 21

आंच के बीसवें अंक से... -- आचार्य परशुराम राय आँच का यह अंक पिछले अंक के क्रमिक विकास में औपचारिकता के लिए है। इसमेंलिए गए तथ्य से लगभग सभी पाठक परिचित होंगे। काव्यार्थ में पुराने बिम्बपरिस्थिति विशेष से संयुक्त होकर किस प्रकार नविनता का झरोखा खोल
 
करण समस्तीपुरी
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आँच - २०

--आचार्य परशुराम राय श्री रावेन्द्रकुमार रवि के नवगीत "बौराए हैं बाज फिरंगी" पर आँच के पिछले अंक पर आयी प्रतिक्रिया ने इस अंक को लिखने के लिए प्रेरित किया। वैसे इस अंक के विचारों पर लम्बे समय से मंथन चल रहा था, लेकिन रावेन्द्र कुमार जी की प्रतिक्रिया को
 
करण समस्तीपुरी
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आँच 18 : 'बौराए हैं बाज फिरंगी'

आँच - आचार्य परशुराम राय आँच के इस अंक में श्री रावेन्द्र कुमार रवि द्वारा विरचित 'बौराए हैं बाज फिरंगी' नामक कविता (गीत) को समीक्षा के लिए चुना गया है। कविता में आज की आतंकवाद और नक्सलवाद की समस्याजनित भावभूमि पर अच्छे और आकर्षक बिम्बों से कविता को
 
करण समस्तीपुरी
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आंच-१६

आंच १६ . आचार्य  परशुराम राय   आंच का यह अंक ऑंच के पिछले अंक (आंच पर है लक्षणा शक्ति) से अभिप्रेरित है। करण समस्‍तीपुरी ने शब्‍द शक्तियों का परिचय देते हुए हिंदी के मुहावरों में लक्षणाशक्ति के एकाधिकार की चर्चा की है। जो निस्‍सन्‍देह सत्‍य है।
 
मनोज कुमार
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आंच-14 :: बरसात का एक दिन

बरसात का एक दिन - आचार्य परशुराम राय रचनाकार के अन्दर धधकती संवेदना को पाठक के पास और पाठक की अनुभूति की गरमी को रचनाकार के पास पहुँचाना आँच का उद्धेश्य है। देखिये राय जी की आंच पर "बरसात का एक दिन" कैसे उतरता है। बरसात का एक दिन कहानी पिछले दिनों इस
 
मनोज कुमार
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आंच पर ‘फिदायीन’

आंच-12-हरीशप्रकाश गुप्त संजय पुरोहित की यह कहानी ‘फिदायीन’ ‘सृजन गाथा’ ब्लाग पर 01 अप्रैल 2010 को पोस्ट की गई थी। आज की आंच में इसी ‘फिदायीन’कहानी पर चर्चा की जा रही है। ‘फिदायीन’ कहानी में संजय पुरोहित ने विषय के लिए जो परिवेश चुना है, वह है आतंकवाद।
 
करण समस्तीपुरी
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चौपाल : आंच पर कवि-कर्म और आलोचक धर्म

ऑच-9 -आचार्य परशुराम राय ऑच के अब तक आठ अंक निकल चुके हैं। इस पर पाठकों की अब तक मिली-जुली प्रतिक्रियाओं ने हमें इस अंक को लीक से हटकर लिखने के लिए प्रेरित किया। इस स्तम्भ द्वारा इस ब्लाग पर आयी रचनाओं के माध्यम से साहित्य के प्रति अपनी समझ के अनुसार
 
करण समस्तीपुरी
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चौपाल : आंच पर है 'भाषा’

आँच-8 -- हरीश प्रकाश गुप्त रचनाकार के अन्दर धधकती संवेदना को पाठक के पास और पाठक की अनुभूति की गरमी को रचनाकार के पास पहुँचाना आँच का उद्धेश्य है। आँच के विगत अंक में लोगों का ध्यान आकर्षित करने वाली जिन काव्य रचनाओं का प्रसंग चर्चा में आया था उनमें से
 
करण समस्तीपुरी
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चौपाल : आंच पर है "किस अधर का गीत...."

आँच-7 -- हरीश प्रकाश गुप्त रचनाकार के अन्दर धधकती संवेदना को पाठक के पास और पाठक की अनुभूति की गरमी को रचनाकार के पास पहुँचाना आँच का उद्धेश्य है। इस ब्लाग पर पिछले दिनों आई जिन कुछ काव्य रचनाओं ने विशेष ध्यान आकर्षित किया, उनमें से एक है करण समस्तीपुरी
 
करण समस्तीपुरी
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चौपाल : आंच पर देसिल बयना

आँच-5 -- हरीश प्रकाश गुप्त रचनाकार के अन्दर धधकती संवेदना को पाठक के पास और पाठक की अनुभूति की गरमी को रचनाकार के पास पहुँचाना आँच का उद्धेश्य है। सृजन का मूल संवेदना है। इसी संवेदना से बीज ग्रहण कर रचनाकार अपने सृजन में जीवन का सत्य और यथार्थ मात्र ही
 
करण समस्तीपुरी
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