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चवीनं खाणार गुजरातला…

आता पर्यंत उगिच वाटायचं की आपण खादाडीवरच जास्त लिहितो की काय ते.. पण तसं नाही. वर्षभरात फक्त ८ लेख म्हणजे काही फार नाहीत हो. माझ्या शरीराचा आकार बघुन उगिच लोकांना वाटतं की मी फक्त खादाडीचेच लेख लिहित असेल म्हणून. बरेच दिवस झालेत गुजरातच्य खादाडीवर
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एक ही लोग, पर दो व्यवहार, कैसे?

भारत हो और गंदगी ना हो ऐसा हो नहीं सकता. हमारे धार्मिक स्थानों से लेकर सार्वजनिक वाहनों, सड़कों, गलियों और मौहल्लों हर जगह गंदगी के ढेर दिखाई दे जाते हैं. नदियाँ नालियाँ बनी हुई है, और हम ऐसे ही जीने के अभ्यस्त हैं. लोगों का व्यवहार ही ऐसा हो गया है क
 
पंकज बेंगाणी
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जनमार्ग “श्रेष्ठ” मार्ग

अहमदाबाद जनमार्ग बीआरटी को केन्द्रीय सरकार ने सर्वश्रेष्ठ नागरिक परिवहन सिस्टम माना है. इस पुरस्कार की दौड़ में दिल्ली मेट्रो भी थी. हालाँकि दिल्ली मेट्रो की अपनी विशेषता है और महत्व भी है. परंतु बीआरटी मेट्रो की अपेक्षा कहीं अधिक सस्ती होती है. जब दे
 
पंकज बेंगाणी
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सचिन के जश्न में भूले सब कुछ

महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में मिलने वाली सफलताएं अचानक सूखती दिख रही है। टी-ट्वेंटी  वर्ल्ड कप के बाद से टीम इंडिया की जीतों और सफलता का ग्राफ लगातार नीचे गिर रहा है। लगातार मिल रही इन नाकामयाबियों के बावजूद हैरानी की बात यह है कि कहीं किसी त
 
सुंदरचंद ठाकुर
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सचिन के जश्न में भूले सब कुछ

महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में मिलने वाली सफलताएं अचानक सूखती दिख रही है। टी-ट्वेंटी  वर्ल्ड कप के बाद से टीम इंडिया की जीतों और सफलता का ग्राफ लगातार नीचे गिर रहा है। लगातार मिल रही इन नाकामयाबियों के बावजूद हैरानी की बात यह है कि कहीं किसी त
 
सुंदरचंद ठाकुर
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कम बेबी, आओ सफाई करें, फोटू आएगी

अमीर होने लग जाते हैं या अमीर होना पड़ने लग जाता है तब कई चीजें फैशनेबल हो जाती हैं. इसे कॉस्मेटिक जीवन कहते हैं. जैसे कि गोल्फ खेलना, काँटे - चाकू से खाना खाना [पिज्जा भी!!!], अंग्रेजी में ही बतियाना [चाहे घटिया सा अनुवाद ही हो पाए] और हाँ “सोस
 
पंकज बेंगाणी
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अहमदाबाद जनमार्ग: उद्घाटन और रात्री की तस्वीरें

अक्टूबर 2009, को अहमदाबाद जनमार्ग बीआरटी के पहले चरण का उद्घाटन हुआ है. ये तस्वीरें उद्घाटन और रोशनी से जगमगाते जनमार्ग की हैं: [स्रोत: ahmedabadbrts.com]
 
पंकज बेंगाणी
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तीन बदलाव, जिससे मैं आश्चर्यचकित हुआ

पिछले दो दिन में मुझे 3 ऐसे अनुभव हुए जिससे पता चला कि भारत वाकई में बदल रहा है. पता नहीं चलता परन्तु कितना कुछ बदल गया है और बदलाव का यह दौर जारी है. पहला अनुभव: अपने पीहर जाने के एक दिन पहले मेरी पत्नी के मोबाइल का सिमकार्ड खराब हो गया. मैं ऑपरेटर
 
पंकज बेंगाणी