ख़मोश हो क्यों दाद-ए-जफ़ा- -इकबाल बानो
ख़ामोश हो क्यों दाद-ए-जफ़ा क्यूँ नहीं देतेबिस्मिल हो तो क़ातिल को दुआ क्यूँ नहीं देतेवहशत का सबब रूज़न-ए-ज़िन्दाँ तो नहीं हैमहर-ओ-माह-ओ-अन्जुम को बुझा क्यूँ नहीं देतेइक ये भी तो अन्दाज़-ए-इलाज-ए-ग़म-ए-जाँ हैऐ चारागरो दर्द बढ़ा क्यूँ नहीं देतेमुंसिफ़ हो
Aug 02 2009 07:02 PM



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