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स्त्री का स्व और आत्मकथा के मानक

               'स्व' या 'सेल्फ' पुंसवादी समीक्षा में आत्मकथा लेखन का बुनियादी आधार है वह कहीं होता नहीं है बनाया जाता है। अर्जित किया जाता है। यह स्वाभाविक नहीं है। स्वाभाविक 'स्व' वह है जो अंतर्भुक्त है।
 
sudha singh
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संघ के हिन्दू संस्कृति के खोखले खेल

संघ जिस हिन्दू संस्कृति की बात करता है वह मूलत: हिन्दू संस्कृति नहीं है। साम्प्रदायिक संस्कृति है। इसकी ही जीरोक्स कापियां प्रचलन में हैं। संघ वालों ने ब्रिटिशशासकों के द्वारा बतायी हिन्दू संस्कृति का अनुकरण करके हिन्दू संस्कृति और हिन्दू राष्ट्र की
 
jagadishwar chaturvedi
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मोदी और गुजराती अस्मिता की राजनीति-2

‘जनता की चेतना’ के नाम पर पांच करोड़ जनता का जयगान वस्तुत: ऐसी जनता का जयगान है जिसने सचेत रूप से वास्तविकता से अपने को अलग कर लिया है। जनता की यथार्थ से विच्छिन्न अवस्था का मीडिया ने खासकर चैनल प्रसारणों में बार-बार प्रक्षेपण किया
 
jagadishwar chaturvedi
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शाहरूख एक्टिविस्ट नहीं हैं राजदीप सरदेसाई

         हिन्दी फिल्मों के बादशाह शाहरूख खान की नई फिल्म 'माई नेम इज़ खान' 12 फरवरी को प्रदर्शित होने जा रही है। शाहरूख का कसूर है कि उन्होंने अपने पड़ोसी देश के साथ सौहार्द्रपूर्ण संबंध की बात कही है। उन पर आरोप है कि वे
 
sudha singh
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स्त्रियों को नाम का अधिकार कहाँ है, यह तो संसार की अन्य वस्तुओं की तरह पुरुषों का एकाधिकार है।

पितृसत्तात्मक इस समाज में नाम पर भी स्त्री का अधिकार कहाँ है ? आपका कुछ खो जाए तो ढूँढ सकते हो, पुलिस में रपट लिखवा सकते हो परन्तु जिसका नाम ही खो जाए वह कहाँ ढूँढे, कहाँ रपट लिखवाए? रपट लिखवाने को भी तो एक नाम चाहिए ! अब नाम खोजती स्त्री किस नाम से