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अस्तित्व

मैं सोई थी मीठे सपनों में खोई थी उस गहरी नींद से जगा दिया मैंने अपने अस्तित्व को तुममें मिला दिया था तुमने ठोकर लगाकर मुझे मेरे अस्तित्व का एहसास करा दिया.
 
mukti
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सच्चा इस्लाम बनाम झूठा इस्लाम

हमारी गँधाती राजनीति में मुल्ला मुलायम सिंह यादव जैसों के पास पूरी जौहर युनिवर्सिटी खड़े करने के पैसे हैं। लेकिन चालीस हजार संस्कृत पाठशालाओं के शिक्षकों को वेतन के नाम पर देने के लिये एक धेला नहीं है; अलबत्ता मदरसों की सालाना ग्रांट में एक से दो दिन
 
कार्तिकेय मिश्र (Kartikeya Mishra)
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राष्ट्रीय पर्व से ड्राई-डे का सफ़र..(भाग-१)

आज उस शख्स पर कुछ लिखने का मन कर रहा है, जो व्यक्तित्व की सीमाओं से परे उठकर एक विचारधारा, एक ‘वाद’ बन चुका है। जिसे दो महाद्वीपों की जनता ने एक काल में पूजा, दो देशों की संसदों ने जिसे धर्म प्रचारकों ईसा, हजरत, बुद्ध के बाद गुजरी सहस्राब्दि तक का सब
 
कार्तिकेय मिश्र (Kartikeya Mishra)
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राष्ट्रीय पर्व से ड्राई-डे का सफ़र…(भाग-२)

गाँधीजी का मक़सद स्पष्ट था- ब्रिटिश सत्ता से सबसे निचले स्तर पर संघर्ष करना। और गाँधी की सबसे बड़ी असफलता भी यहीं रही। सत्य तो यह था कि कुटिल ब्रिटिश शासन ने भारतीय जनता का शोषण सीधे नहीं किया, बल्कि सामंतों-जमींदारों जैसे बिचौलियों के माध्यम से। फिर
 
कार्तिकेय मिश्र (Kartikeya Mishra)