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एक इल्ज़ामः डॉ. राही मासूम रज़ा और सआदत हसन मण्टो पर

आज स्वप्निल कुमार आतिश से लम्बी साहित्यिक चर्चा होती रही. एक जैसा सोचने वाले मिल जाएँ तो ये फैसला मुश्किल हो जाता है कि विचार किसके हैं और आए किसके दिमाग़ में हैं. बात मण्टो से शुरू हुई और राही मासूम रज़ा पर खतम हुई. अब खतम हुई कि एक नए सिलसिले की शुरुआत
 
सम्वेदना के स्वर
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कई दिन से पड़ी है बाडी

आज महिला दिवस है. मीडिया में आज महिलाओं पर ढेर सारी सामग्री है. बातें लगभग एक जैसी कहीं सबला, कही अबला. कहीं अत्याचार तो कहीं आत्म विश्वास की कहानी. मेरी कहानी थोड़ा फर्क है. कहानी है ब्रा या कस्बाई भाषा में बाडी की. कई दिनों से सोच रहा था कि लिखूं य