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चन्चल मन….
नमस्कार!! पहचाना मुझे? भूल तो नही गये ना? मै वही पुरानी, जो कभी कविताएं और कभी लेख लिख देती थी, जो मेरे मन मे आये वो बातें क्ररती थी…. आज फ़िर हाजिर हूं, अपने मन के साथ… ** आजकल दिलीप बहुत अच्छी कविताएं लिख रहे हैं.. उन्होने ’मन’ को कुछ सलाह
Jun 12 2010 06:00 PM



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