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चन्चल मन….

नमस्कार!! पहचाना मुझे? भूल तो नही गये ना? मै वही पुरानी, जो कभी कविताएं और कभी लेख लिख देती थी, जो मेरे मन मे आये वो बातें क्ररती थी…. आज फ़िर हाजिर हूं, अपने मन के साथ… ** आजकल दिलीप बहुत अच्छी कविताएं लिख रहे हैं.. उन्होने ’मन’ को कुछ सलाह
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ई-पण्डित की अज्ञातवास से वापसी

ePandit comes out of hibernation हिन्दी चिट्ठाजगत के सभी मित्रों एवं पाठकों को नमस्कार। जैसा कि आप सब जानते हैं कोई दो साल पहले हम चिट्ठाकारी से अस्थायी संन्यास लेकर इंसानों की दुनिया में वापस चले गये थे। यह सब अचानक ही हुआ, इसका कारण इण्टरनेट एवं
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पाठकों की प्रतीक्षा में

कई साल पहले (2004 में) जब यह चिट्ठा शुरू हुआ तो यही कोई 20 चिट्ठाकार थे हिन्दी चिट्ठा जगत में — पाठकों की संख्या भी एकाध सैंकड़े से अधिक नहीं रही होगी। इन्तज़ार रहता था कि कोई लिखे तो हम पढ़ें और टिप्पणी करें। आजकी स्थिति, जब हज़ारों की संख्या में
 
रमण कौल
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राजीव श्रीनिवासन – गांधार के कुरुक्षेत्र से

मैं आजकल राजीव श्रीनिवासन के चिट्ठे का नियमित पाठक बन गया हूँ। राजीव एक 23 वर्षीय युवा चिट्ठाकार हैं – पर इस चिट्ठाकार के विषय में विशेष यह है कि यह जिस जगह से अपना ब्लॉग लिख रहे हैं, वह आजकल विश्व की सब से जोखिम भरी जगहों में से एक है। जी हाँ,
 
रमण कौल
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एक साल एक दहाई

इस चिट्ठे को पढ़ने वाले सभी दोस्तों को नया साल मुबारक। इस दिन पर इस चिट्ठे पर बहुत दिनों बाद कुछ बड़बड़। आज एक नई दहाई शुरु हुई है, जो उम्मीद है दुनिया के लिए कुछ खुश खबर ले कर आएगी। इस सदी की पहली दहाई में आतंक का ही बोलबाला रहा – 9-11, 26-11,
 
रमण कौल
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टैस्टिंग: मोबाइल से ब्लॉग पोस्ट

यह टैस्ट पोस्ट नोकिया 6070 पर ओपेरा मिनी v3.1 में सीधे ब्लॉगर.कॉम से (वेब इण्टरफेस से न कि ईमेल द्वारा) लिखी जा रही है देखते हैं कि बात बनती है या नहीं?
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अभिवादन!

” नमस्ते!! कैसी हैं आप? ” जैसे ही मैने हिन्दी की उन वृद्ध अध्यापिका से कहा, वे खुश हो गयीं और मुझे अपने पास ही जगह देकर बैठने को कहा… मुस्कुरा कर उन्होने नमस्ते कहा और कहने लगीं आजकल तो कोई कहता नही है नमस्ते , तुमने कहा तो अच्छा
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कोई हर्ज नही……

यूं तो बताने से कोई फ़ायदा नही , फ़िर भी बता दूं तो कोई हर्ज नही! तुम चाहो तो सुन लो, नही तो नही, हर बात सुनना कोई फ़र्ज नही! साथ हो मेरे तुम, ये यकीन ही बहुत है, साथ साबित करो, कोई गर्ज नही! जिये जिसके संग संग, मरें भी उसी संग, जमाने की ऐसी कोई तर्ज
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मेरी कविता मेरी आवाज!

करीब ४ साल पहले नासिक आकाशवाणी से प्रसारित “विविधा” मे मेरा एक छॊटा सा कार्यक्रम प्रसारित हुआ था. जिसे मैने अपने रेडिओ सेट से टेप किया था. कार्यक्रम मे आकाशवाणी की डॊ. अनुरुचा सिंह से बातचीत की साथ ही मैने अपनी कुछ रचनाएं पढी थी…..
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घरकुल….

घरकुल, घर है कुछ खास लडकियों का…. शिल्पा, पिन्की, श्रुति, प्रिया, अदिति, रेणुका,लीना..आदि. श्रीमती फ़डके के साथ हम इनके घर पहुंचे. वे सब हमे देख खुश हो गयीं.. सब ठीक से बैठी थी…कोइ ठीक से नही बैठी तो दूसरी ने खींच कर उसे बैठाया… . कि
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बेनामीयों के नाम…..

यहां और यहां से पता चला कि हिन्दी ब्लॊग जगत के नामी- गिरामी चिट्ठाकार इन दिनो बेनामीयों से हैरान परेशान हैं… उनके लिये मेरे पास ज्यादा तो कुछ कहने है नही.. बस किसी की लिखी ये सुन्दर पन्क्तियां दोहराना चाती हूं…. भला किसी का कर न सको तो बु
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कभी धूप, कभी छांव..

वैसे तो आप मेरी आवाज कई दिनों पहले सुन चुके हैं. इस बार सुनिये मेरी और मेरी दीदी के सम्मिलित स्वर मे एक पुराना गीत……. कभी धूप कभी छांव
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अभिनन्दन!!

बाधाओं को दूर भगा दो, नई-नई अब राह बना दो, कर लो तुम नारि अभिनन्दन! नही रही मै ऐसी-वैसी, नही परिक्षा सीता जैसी! अब ना मुझको कोई बन्धन! कर लो… अब तक मै ना कुछ कह पाई, कुछ कसमें थीं मैने खाई, खत्म हुई अब सारी उलझन! कर लो… तन को मेरे राख किय
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स्माइल……….:)

कल ऒस्कर समारोह मे संगीतकार रहमान की “जय” के साथ ही पिन्की की “स्माइल” भी चर्चित रही. पिन्की को देख मुझे गुड्डी याद आ गयी. बात कुछ १० साल पुरानी है. उन दिनो हम दूसरे शहर मे रहते थे. वहां गुड्डी हमारे घर आई थी. पिन्की की तरह ही
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सुनहरी शुभकामनाएं………..

इस नववर्ष के आगमन के समय मै अपने भाईयो‍, भाभीयो‍, दीदी और खूब सारे बच्चो‍ के साथ थी….. व्यस्त थी, मस्त थी. विभिन्न सम्पर्क स्थलो‍ पर तमाम मित्रो‍ के शुभकामना संदेश मिले… मै समय पर जवाब नही दे पाई .. इस नये वर्ष के 11 दिन बीते चुके है‍ लेक
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Let’s make a difference

Hi Friends, First of all I am sorry for again I am not writing regularly rather say I am not writing et al. I would not say I have been lazy but I really lacked motivation to write. In fact it would be more apt to say that I had no emotion so strong