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धुप छ्त पर जब चडी होगी

धुप छ्त पर जब चडी होगी चांदनी पिछवाडे खड़ी होगी झिलमिला उठी अँधेरी रात हाथ बच्चे के फुलझडी होगी पहाडी रात को दौड़ गई आँख चाँद से जा लड़ी होगी गाड़ी सिग्नल पर खड़ी होगी कैसी इन्तिज़ार की घड़ी होगी अशोक प्लेटो
 
Rahul kundra
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कभी तो पतंग उडा के देख

कभी तो पतंग उडा के देख ख्वाब से आँख लड़ा के देख ख़ुद ठिकाने पहूचा आएगी हवा को ख़त पकड़ा के देख हँसेगी दो - चार मुलाकातों में जिंदगी को जरा चिढा के देख आइना देखता रह जाएगा पाव ज़रा लडखडा के देख घुल - मिल जाएगा हवाओ में परिंदे को ज़रा उडा के देख अशोक प्
 
Rahul kundra