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मंगलोर विमान दुर्घटना

मंगलोर विमान दुर्घटना...........बहुत दुर्भाग्य है!मैं अपने दुख को व्यक्त कर रहा हूँ|मौसम अच्छा है!हवाई में जहाज की गलती नहीं!!रनवे में गलती नहीं!!!फिर कहाँ गलती है?फिर दोषी कौन है?मैं ....... सिवाय क्या कर सकता !?मारे गये लोगों के
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एक सपना भारत नवनिर्माण का

मेरे एक घनिष्ट मित्र हैं। जब भी हम साथ बैठते हैं तो प्रायः एक ज्वलंत समस्या पर विचारों का आदान प्रदान होता है और प्रायः एक हल ढूंढ़ने की कोशिश की जाती है। देश पर आतंकी हमले और उसके बाद नेताओं की आपस में छींटाकशी परसों रात हमें चुभते रहे। सोचा कि क्या
 
अंकुर वर्मा
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मेरी नाज़नीं तुम मुझे भूल जाना

स्वर: अहमद हुसैन और मोहम्मद हुसैन मेरी नाज़नीं तुम मुझे भूल जाना, मुझे तुमसे मिलने न देगा ज़माना। कभी हम मिले थे किसी एक शहर में, कभी हम मिले थे गुलों की डगर में। समझना कि था ख़्वाब कोई सुहाना, मेरी नाज़नीं तुम मुझे भूल जाना। जुदाई के सदमों को हँस हँस के
 
अंकुर वर्मा
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पुनरागमन

नमस्कार मंडळी, गेल्या सहा-सात महिन्यात या अनुदिनीवर काहीच नाही लिहिले. खरतर न लिहिण्यामागे असे काही खास कारण नव्हते. पण लेखन झाले नाही. तसा मी काही लेखक वगैरे नक्कीच नाही. पण अनुदिनीवर लेखन करणे तसा आनंद दायक अनुभव आहे. तो आनंद मला परत मिळवायचा आहे आणि
 
आर्य चाणक्य