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अवधी उपन्यास- क़ासिद (16)

आजु जानौ टिल्लू के स्कूल म छुट्टी अहै। दादी सबेरे बताएनि तौ लेकिन इनकी समझि कुछु नाई आवा कि आजु काहे क छुट्टी है कौनौ तिथि आए जहिमा दादी देर लगे मंदिर म पूजा करती हैं। टिल्लू मौका निखारि क आयशा क घरे पहुंचि गे। दून्हौं याक दूसरे के समहे बैठि हैं। आयशा क
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अवधी उपन्यास- क़ासिद (13)

शुक्लाजी अपने लरिका पर अपनी अम्मा क पानी छिड़कत देखेन त पानी केरि बूंदन त जइसे उन क्यार अतीत टपकन लाग। वा सामौ अइसिहि रहै। शुक्लाजी केरि छत पर तेरे तमाम टोली आवति दिखाई दे रही रहैं। जेत्ते लोग इ टोलिन म सामिल रहैं सब कि जबान पर याकै बात- जय श्री राम, जय
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अवधी उपन्यास- क़ासिद (12)

कुबेरि बेरिया गांवन म वौ बखत होति है जब घरन के बाहर गोरु हरहा पहुंचन लागति हैं। जिनके घर मा लालटेन है उई लालटेन क सीसा साफ करैम औ मिट्टी का तेल चेक करन लागत हैं औ जिनके घर मां कुप्पी है उ अपनि अपनि कुप्पिन केरि बाती क्यार ल्यांड़ा झरिहा क कुप्पी जला देति