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मन्नत

अवतार सिंह कंवर“ए सीबो, तूने मुझे बताया ही नहीं कि तेरी माँ मेले में जाएगी!”“चाची, बस अचानक ही तैयारी हो गई। मैंने तो कहा था कि क्या लेना है मेले में, पर माँ नहीं मानी। बोली—पाँच पीरों की समाधि पर माथा टेक आऊँगी। मन्नत की थी तेरे भाई की, जब उसे मियादी
 
दीपशिखा