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दिल के अरमानो को...!!!

दिल के अरमानो को गर अल्फाज़ मिले होते , आज जमाने के रूबरू न लब सिले होते । लग ही जाता पता दिल-ए-दर्द जमाने को ,.. संग दिल भीड़ के सामने लब हिले होते । शुक्र - गुजार होता उन बेगानों का,न अपनों से कोई शिकवे -गिले होते । अपनी मंजिल मिल जाती खद-ब-खुद , खुली
 
कमलेश वर्मा