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अमर्त्य सेन के अर्थदर्शन की लोकपक्षधरता

चर्चा लायक बीसवीं शती की बहुत-सी बातें हैं. मसलन इस शताब्दी ने दो विश्वयुद्ध झेले. परमाणु बमों से उत्पन्न भीषण तबाही देखी. साम्राज्यवाद का उत्थान देखा और संग-संग पतन भी. गाँधी जी ने अपने कर्मयोगी जीवन का महत्त्वपूर्ण अंश इसी शताब्दी में जिया. इसी शती में
 
kashyap omprakash
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टेलीवीजन (या रेडियो) की जरूरत

लम्बे समय से मैने टेलीवीजन देखना बन्द कर रखा है। मैं फिल्म या सीरियल की कमी महसूस नहीं करता। पर कुछ दिन पहले सवेरे जब मैं अपनी मालगाड़ियों की पोजीशन ले रहा था तो मुझे बताया गया कि दादरी के पास लोग ट्रैक पर आ गये हैं और दोनो ओर से ट्रेन यातायात ठप है। [...]
 
Gyandutt Pandey
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प्रधान, पोखरा, ग्रीस और पुर्तगाल

मैं पिछले महीने में प्रधान जी से कई बार बात करने का यत्न कर चुका। हर बार पता चलता है कि पोखरा (तालाब) खुदा रहे हैं। लगता है नरेगा की स्कीम उनका बहुत समय ले ले रही है। सरकार बहुत खर्च कर रही है। पैसा कहीं से आ रहा होगा। हर वैसी स्कीम जो कम [...]
 
Gyandutt Pandey
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हमें हमारी जमीन दे दो, आसमां लेकर क्या करेंगे

केंद्रीय वित्त मंत्री का कार्यभार संभाल रहे श्री प्रणव मुखर्जी ने 16 फरवरी को संसद में संप्रग सरकार का अंतरिम बजट(2009-10) प्रस्‍तुत किया। संसद के दोनों सदनों में अंतरिम बजट पर हुई चर्चा में भाग लेते हुए भाजपा सांसदों ने अपने आक्रामक भाषणों में संप्र
 
संजीव कुमार सिन्हा
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देश की मजबूत अर्थव्यवस्था बनी मजबूर अर्थव्यवस्था

केंद्रीय वित्त मंत्री का कार्यभार संभाल रहे श्री प्रणव मुखर्जी ने 16 फरवरी को संसद में संप्रग सरकार का अंतरिम बजट(2009-10) प्रस्‍तुत किया। संसद के दोनों सदनों में अंतरिम बजट पर हुई चर्चा में भाग लेते हुए भाजपा सांसदों ने अपने आक्रामक भाषणों में संप्र
 
संजीव कुमार सिन्हा
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टेढ़ी नज़र वाला अर्थशास्त्र

सन 2005 में प्रकाशित एक छोटी-सी किताब फ्रीकोनोमिक्स ने अर्थशास्त्र और दुनिया के प्रति लोगों का नज़रिया बदलने में बहुत बड़ी भूमिका अदा की. न्यूयॉर्क टाइम्स की बेस्ट सेलर सूची में रही स्टीवेन डी. लेविट्ट और स्टीफ़ेन जे. ड्युबनेर कृत इस किताब की दुनिया
 
डॉ दुर्गाप्रसाद अग्रवाल