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नेता नौटंकी...

आखिरकार झारखण्ड में नेताओं की नौटंकी का पर्दा पड़ ही गया. अभी तक जिस तरह से शिबू सोरेन कुर्सी से चिपके हुए थे उससे तो यही लगता था की अभी यह मामला और खिंचने वाला है पर किसी भी दल द्वारा उनको समर्थन न दिए जाने से आखिर कार उनकी कुर्सी चली ही गयी. एक नया
 
डा०आशुतोष शुक्ल
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नक्सली समस्या और सुरक्षा

पश्चिम बंगाल के मिदनापुर में जिस तरह से माओवादियों ने पटरी पर गड़बड़ी कर ज्ञानेश्वरी एक्सप्रेस को दुर्घटनाग्रस्त कराया वह बहुत ही चिंताजनक है. इस तरह के हमले करके माओवादियों ने इस बात की पूरी झलक दे दी है कि वे जब चाहें जहाँ चाहें कुछ भी कर सकते हैं. यह
 
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फिर घुसे आतंकी

खुफ़िया रिपोर्टों से एक बार फिर से यह बात सामने आई है कि देश में गड़बड़ी करने के उद्देश्य से १४० आतंकियों का एक जत्था पश्चिमी सीमा से घुसपैठ करके अंदर आ चुका है. जैसा कि पहले भी खुफ़िया आधार पर दो बार इस तरह के प्रयासों को नाकाम करने में सफलता पाई जा
 
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सड़क सुरक्षा और हम ?

 इस चित्र को देखकर क्या सोचते हैं आप ? क्या लगता है ? हमारे देश में प्रतिभाओं की कमी नहीं ? किन नियमों के तहत हम सड़क पर चलते हैं ? नहीं... घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है इतने सारे सवाल किसी से भी पूछ लिए जाएँ तो वह घबरा तो जायेगा ही न ? आप सभी भी
 
डा०आशुतोष शुक्ल
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चिदंबरम की पहल

देश के गृह मंत्री के रूप में पी चिदंबरम ने जिस तरह से लालगढ़ में जाकर केंद्र सरकार के शासन की धमक को माओवादियों के गढ़ तक पहुँचाया वह अपने आप में बहुत बड़ा सन्देश है. वैसे तो इस तरह की सभी बातें केवल मीटिंग में ही की जाती हैं पर वास्तविक धरातल पर उतरते
 
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पाक ने की तालिबान से तौबा..

कभी क्या आज भी तालिबान का सबसे बड़ा समर्थक अब उनके नियंत्रण से बाहर हो जाने पर पाक के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने यह कहा है कि अब हम नहीं चाहते कि अफगानिस्तान में कभी तालिबान का शासन हो. एक समय था जब पाक ने पूरे जोश से इन तालिबानों की मदद की थी और
 
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सोरेन का रोना....

झारखण्ड के मुख्यमंत्री शीबू सोरेन ने जिस तरह से यह कहा कि नक्सलियों के खिलाफ चलाये जा रहे अभियान ग्रीन हंट के बारे में उनसे पूछा नहीं गया अपने आप में ही बहुत बड़ा झूठ है. केंद्र सरकार पिछले कुछ समय से नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में क्षेत्रों में सख्ती करने
 
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२६/११ में पाक तो था ही !

२६/११ के मुंबई हमले में पाक की संलिप्तता तो पहले से ही जग जाहिर है पर अब अभियोजन पक्ष ने जो नए सुबूत जोड़े हैं उनसे यह बात सामने आ रही है कि इस सारे मामले में पाक सेना की पूरी भागीदारी भी थी क्योंकि जिस तैयारी के साथ यह हमला किया गया था उसमें एक पूरे
 
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धार्मिक स्थल भी राम भरोसे....

प्रतापगढ़ में संत कृपालु आश्रम में मची भगदड़ ने एक बार फिर से हमारा ध्यान इधर की ओर खींचा है. आज के समय में जब बहुत सारे बड़े बड़े आयोजन जल्दी जल्दी किये जाने लगे हैं तो भी देश में इनकी सुरक्षा के बारे में कभी भी कोई विचार नहीं किया जाता है. इस तरह की
 
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मलेशिया में "अल्लाह" पर विवाद...

दुनिया में असहिष्णुता किस हद तक बढती जा रही है इसका ताज़ा उदाहरण मलेशिया में देखा जा सकताहै. वहां पर कट्टपंथियों ने सरकार पर दबाव डालकर यह आदेश पारित करा लिया था कि गैर मुस्लिम "अल्लाह" शब्द का प्रयोग नहीं कर सकते हैं. इस बारे में वहां के न्यायालय में
 
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नक्सल प्रभावित राज्य

देश के गृह मंत्री चिदम्बरम ने २४ तारीख़ को नक्सल प्रभावित राज्यों के मुख्य सचिवों/ पुलिस प्रमुखों की बैठक का आयोजन किया है वह ठीक ही है, अभी तक देश में इस समस्या पर खास तौर से कुछ भी नहीं सोचा गया है जिसके कारण बहुत सी समस्याएं सामने आ रही हैं. अच्छा
 
डा०आशुतोष शुक्ल
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हेडली के खतरनाक इरादे

हेडली के मामले में रोज़ ही कुछ नया सामने आ रहा है उसे देख कर तो लगता है कि इस आतंकी का बहुत बड़ा नेटवर्क था और दुनिया भर में काफी लोग इसकी मदद भी कर रहे थे। पाकिस्तान से लेकर दुनिया के तमाम हिस्सों में घूमने वाला यह शख्स कोई मामूली हस्ती नहीं हो सकता
 
डा०आशुतोष शुक्ल
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क्या चाहते हैं ये नेता ?

अब बारी मध्य प्रदेश की है आख़िर ये नेता क्यों नहीं समझ पाते हैं कि देश में इस तरह की बातों का कोई स्थान नहीं है। शिवराज सिंह के एक बयान ने क्षेत्रवाद को एक बार फिर से हवा दे दी है। कोई भी किसी तरह के बयान देने के लिए भारत में स्वतंत्र है पर जब ये बया
 
डा०आशुतोष शुक्ल
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पाक के न्यायमूर्ति ...

जब किसी देश में कानून व्यवस्था का कबाड़ा हो जाता है तभी ऐसी घटनाएँ देखने सुनने में आती हैं जैसी कल पाक से सुनाई दी। २६/११ के केस से जुड़े जज बाकर अली राणा ने अपने को इस काम के लिए असमर्थ बताया है और व्यक्तिगत कारणों का हवाला देते हुए लाहौर उच्च न्यायाल
 
डा०आशुतोष शुक्ल